बारां: किसानों ने पुलिस चौकी का निर्माण रुकवाने के लिए एसपी को सौंपा ज्ञापन
ग्राम दांता के किसानों ने जमीन की वैज्ञानिक पैमाइश होने तक केलवाड़ा पुलिस चौकी का कार्य रोकने और पुश्तैनी भूमि बचाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

बारां में किसान महापंचायत के प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह और अन्य किसान पुलिस अधीक्षक को ग्राम दांता में पुलिस चौकी निर्माण के विरोध में ज्ञापन देते हुए। (बाएं से दाएं: किसान प्रतिनिधिमंडल और पुलिस अधीक्षक)
बारां। किसान महापंचायत के प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह के नेतृत्व में क्षेत्र के किसानों ने पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपकर ग्राम दांता में निर्माणाधीन केलवाड़ा पुलिस चौकी के कार्य को तत्काल रुकवाने की पुरजोर मांग की है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनके खाते के खेतों की दोबारा वैज्ञानिक पद्धति से पैमाइश नहीं हो जाती, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है क्योंकि प्रभावित किसान अपनी पुश्तैनी भूमि को बचाने के लिए लामबंद हो गए हैं।
घटनाक्रम के अनुसार, ग्राम दांता के अनेक किसान सन 1960 से अपनी पुश्तैनी खाते की जमीनों पर काबिज हैं और निरंतर कृषि कार्य करते आ रहे हैं। ज्ञापन में इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है कि आज तक राजस्व विभाग द्वारा इन किसानों को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही कभी बेदखली की कोई वैधानिक कार्यवाही अमल में लाई गई है। किसानों का आरोप है कि वर्ष 1960 के पश्चात क्षेत्र में दोबारा सेटलमेंट (बंदोबस्त) की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई है, जिसके कारण हल्का पटवारियों के पास अद्यतन नक्शे उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद, सेटलमेंट अधिकारियों ने कथित तौर पर ग्राम दांता के मात्र एक खसरा नंबर 39 का नक्शा तैयार कर उसे वर्ष 2008 में पुलिस चौकी के नाम आवंटित बता दिया।
किसानों का तर्क है कि प्रशासन ने पुलिस चौकी के लिए तो जबरन पैमाइश कर दी, किंतु किसानों के हक की खातेदारी जमीन की पैमाइश की अनदेखी की गई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके खाते के खेतों की पैमाइश कर उनका रकबा पूरा नहीं किया गया, तो भविष्य में किसानों के मध्य आपसी विवाद और झगड़े बढ़ने की प्रबल संभावना है। उल्लेखनीय है कि पीड़ित किसान पूर्व में भी खेतों की पैमाइश हेतु तहसीलदार कार्यालय में विधिवत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह के साथ राजेंद्र शर्मा, सुखविंदर सिंह, राम सिंह, गुरलाल सिंह, परमजीत सिंह, जगदीश सिंह अटवाल और प्रतापचंद शर्मा सहित बड़ी संख्या में पीड़ित किसान उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में न्याय की गुहार लगाई है।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
