बारां। राजस्थान के बारां जिले में दवा विक्रेताओं ने अपनी लंबित मांगों और लाइसेंस प्रक्रिया में आए नए नीतिगत बदलावों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति और जिला रिटेल केमिस्ट समिति ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों के प्रति गहरा असंतोष व्यक्त किया है। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजीव सक्सेना के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में दवा विक्रेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन केंद्रों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा।

दवा विक्रेताओं की सबसे प्रमुख आपत्ति मेडिकल स्टोर लाइसेंस के लिए वाणिज्यिक भूमि (Commercial Land) की अनिवार्यता को लेकर है। ज्ञापन में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई कि सरकार के इस नए आदेश ने प्रदेश के शहरों, कस्बों और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों दवा विक्रेताओं को असमंजस और संकट में डाल दिया है। वास्तविकता यह है कि अधिकांश छोटे कस्बों और गांवों में आवासीय एवं वाणिज्यिक मिश्रित भूमि पर ही मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। जिला प्रभारी किशन शर्मा ने तर्क दिया कि ग्रामीण अंचलों में शुद्ध रूप से वाणिज्यिक भूमि की उपलब्धता अत्यंत सीमित है, ऐसे में इस नियम की सख्ती से न केवल बेरोजगारी बढ़ेगी, बल्कि कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो जाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस निर्णय पर जनहित में पुनर्विचार किया जाए और पूर्ववर्ती उदार नियमों को ही बहाल रखा जाए।

संकट का दूसरा बड़ा पहलू राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के भुगतान से जुड़ा है। आरजीएचएस के नोडल अधिकारी और सीएमएचओ डॉ. संजीव सक्सेना को सौंपे गए ज्ञापन में विक्रेताओं ने अपनी आर्थिक व्यथा साझा की। अनुबंध (MOU) के अनुसार दवा विक्रेताओं को दवा आपूर्ति के 21 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए, लेकिन बारां सहित प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले आठ महीनों से भुगतान अटका हुआ है। दवा विक्रेताओं ने बताया कि भुगतान न मिलने के बावजूद वे अनुबंध की शर्तों के कारण लाभार्थियों को दवाइयां देने के लिए बाध्य हैं। इस भारी वित्तीय असंतुलन के कारण होलसेल विक्रेताओं ने अब रिटेल स्टोरों को उधार माल देना बंद कर दिया है, जिससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला चरमरा गई है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला रिटेल केमिस्ट समिति के अध्यक्ष लोकेश तिवारी, महासचिव धनराज सुमन और कोषाध्यक्ष व जिला प्रभारी किशन शर्मा ने पुरजोर तरीके से दवा विक्रेताओं का पक्ष रखा। इस अवसर पर संगठन के संरक्षक सौरभ भार्गव, इकबाल हुसैन, हेमंत गुप्ता और गुलशन अदलखा सहित बड़ी संख्या में दवा विक्रेता उपस्थित रहे। इस विरोध प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि दवा विक्रेता अब और अधिक वित्तीय बोझ सहने की स्थिति में नहीं हैं और वे सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं ताकि आम जनता को मिलने वाली आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रह सकें।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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