बारां: डोल मेले में सूर्यास्त से पहले जलवा पूजन कराने की उठी मांग
देर रात जलवा पूजन से धार्मिक परंपरा प्रभावित होने और अंधेरे के कारण श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी को देखते हुए विभिन्न समाजों ने अखाड़ा संचालकों से पहल की अपील की।

तस्वीर में बारां के डोल मेला परिसर में सजे देव विमान और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिख रही है।
बारां। हाड़ौती के ख्यातनाम डोल मेले की शुरुआत जिला मुख्यालय पर जलझूलनी एकादशी पर्व के साथ बड़े हर्षोल्लास से होती है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जलवा पूजन से शुरू होता है। इस अवसर पर शहर के समस्त देव मंदिरों से 60 से अधिक देव विमान और एक दर्जन भव्य अखाड़े शोभायात्रा के रूप में डोल मेला तालाब परिसर पहुंचते हैं। यहां ढोल-नगाड़े, घंटाल और शंखध्वनि के बीच आरती के साथ माता यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण के जलवा पूजन की रस्म अदायगी होती है।
लंबे समय से जलवा पूजन सूर्य की साक्षी में नहीं हो पाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लगातार शोभायात्रा के देरी से डोल मेला परिसर पहुंचने के कारण जलवा पूजन काफी अंधेरी रात में संपन्न होता है। इसे शास्त्र परंपरा के अनुसार उचित नहीं बताते हुए अब समय पर जलवा पूजन कराने की मांग उठी है।
अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष व सवर्ण समाज के प्रमुख वक्ता ललित मोहन खंडेलवाल, वैश्य महासम्मेलन के अध्यक्ष कमलेश विजयवर्गीय, महामंत्री सुरेश गोयल, युवा अध्यक्ष भानू पोरवाल, आनंद बंसल सहित वैश्य समाज और ब्राह्मण समाज के प्रमुख घटकों अग्रवाल-खंडेलवाल-विजयवर्गीय-पोरवाल-माहेश्वरी, सनाढ्य ब्राह्मण, आदिगौड़ ब्राह्मण, हरियाणा गौड़ ब्राह्मण, गौतम ब्राह्मण सहित कई समाजों के प्रमुख लोगों ने अखाड़ा संचालकों से इस दिशा में पहल करने की मांग की है।
समाज के प्रमुख लोगों का कहना है कि शोभायात्रा में अखाड़ों की प्रमुख भूमिका होती है और वे शोभायात्रा में सबसे आगे रहते हैं। यदि अखाड़े सही समय पर श्रीजी चौक से रवाना हों और समय की पाबंदी रखें तो सूर्यास्त से पूर्व डोल मेला परिसर तक पहुंचा जा सकता है। अखाड़ों में खेलने वाले युवा भी धार्मिक परंपरा से जुड़े हुए रहते हैं।
सूर्यास्त से पूर्व समय पर जलवा पूजन करवाने में अखाड़ों की प्रमुख भूमिका बताते हुए कहा गया है कि अखाड़ा संचालकों को शोभायात्रा की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए देव विमानों के जलवा पूजन को समय सीमा में करवाने के लिए आगे बढ़कर प्रयास करना चाहिए, ताकि शास्त्र परंपरा के अनुसार धार्मिक पहचान बनी रहे।
देर रात अंधेरे में जलवा पूजन होने से हजारों दर्शनार्थियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस दिवस शोभायात्रा के कारण देर रात्रि तक सुरक्षा की दृष्टि से विद्युत आपूर्ति बंद रखी जाती है। इसके चलते गलियों और सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार सूर्य की साक्षी में जलवा पूजन होने से अंधेरे की समस्या से भी निजात मिल सकती है।
सभी समाज चाहते हैं कि जलवा पूजन समय पर और भगवान श्रीकल्याण राय जी के विमान की साक्षी में हो। लेकिन धीरे-धीरे विलंब होने के कारण जब तक श्रीकल्याण राय जी और रघुनाथ जी का देव विमान पहुंचता है, तब तक अन्य विमान वहां से रवानगी ले लेते हैं। ऐसे में जिस स्वरूप में सामूहिक आरती होनी चाहिए, वह भी दिखाई नहीं देता।
सभी समाजों के पदाधिकारियों ने अखाड़ा संचालकों से मिल बैठकर सही समय पर सूर्य की साक्षी में जलवा पूजन कराने के लिए पहल करते हुए आगे आने की मांग की है, ताकि डोल मेले से जुड़ी धार्मिक परंपरा बनी रहे और जलवा पूजन निर्धारित समय में संपन्न हो सके।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
