डीज़ल-पेट्रोल नियम पर भड़के किसान और व्यापारी, बारां महासंघ ने मोर्चा खोल सरकार से की संशोधन की मांग
ईंधन वितरण के नए सरकारी नियमों से बारां में मचा बवाल! प्रतिदिन 200 लीटर की सीमा और केन में डीजल-पेट्रोल भरने पर रोक से किसान, व्यापारी और उद्योगपति बेहद परेशान हैं। जानिए क्यों व्यापार महासंघ ने सरकार के इस फैसले को अव्यवहारिक बताते हुए मोर्चा खोल दिया है।

बारां में व्यापार महासंघ के सदस्यों ने डीजल वितरण के नए नियमों के विरोध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
बारां। भारत सरकार द्वारा ईंधन वितरण को लेकर जारी किए गए नए और कड़े नियमों के खिलाफ आमजन, व्यापारियों, लघु उद्यमियों और किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। सरकार द्वारा प्रतिदिन मात्र 200 लीटर डीजल देने की सीमा तय करने, सीधा वाहनों या जनरेटरों में ही ईंधन भरने और बोतल या केन (गैलन) में डीजल-पेट्रोल देने पर पूरी तरह से रोक लगाने के आदेश ने जमीन पर एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। इस अव्यवहारिक नियम के विरोध में बारां व्यापार महासंघ ने अब सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है और जिला कलेक्टर के माध्यम से भारत सरकार को ज्ञापन भेजकर नियमों में तुरंत आवश्यक संशोधन और छूट देने की पुरजोर मांग की है।
बारां व्यापार महासंघ के अध्यक्ष योगेश बाटा ने इस नियम की विसंगतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और लघु औद्योगिक इकाइयों को समय पर पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती है, जिसके कारण वे पूरी तरह से डीजल जनरेटरों पर निर्भर हैं। वर्तमान समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि खेतों में सिंचाई, हकाई और बुवाई का काम जोरों पर है। सिंचाई के लिए किसान जनरेटर और मोटरों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें उठाकर पेट्रोल पंप तक ले जाना कतई संभव नहीं है। इसके अलावा, यदि किसी ट्रैक्टर, दुपहिया या चार पहिया वाहन का ईंधन रास्ते में खत्म हो जाए, तो चालक केन लेकर ही पेट्रोल पंप जाएगा क्योंकि बंद वाहन को खींचकर पंप तक लाना व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में केन और बोतल में ईंधन न देने का फैसला पूरी तरह अप्रासंगिक है।
इस तुगलकी आदेश की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए व्यापार महासंघ के पदाधिकारी देवकीनंदन बंसल, ललित मोहन खंडेलवाल, वेद प्रकाश टक्कर, कलीम भाई बोहरा, सेन कुमार अदलक्खा, विमल बंसल, विजय भाई पतीरा, कमलेश गोयल, राकेश जैन, मनीष लश्करी, महामंत्री कन्हैयालाल चित्तौड़ा, शंकर माहेश्वरी, नरेश नंदवाना, उपाध्यक्ष नरेश खंडेलवाल, जगदीश बंसल, हर्षित जैन, पीयूष गर्ग, कमलेश जैन, मनोज बाठला, आनंद बंसल, भानु पोरवाल, मनोज पिपलानी, संजय शर्मा, दिलीप चौबे, पुनीत कुमरा, महेंद्र शर्मा, राहुल कुमरा, मनीष गर्ग, धीरज हल्दिया, कपिल पोरवाल, आसिफ भाई, शशीकांत जैन और रामस्वरूप खींची आदि ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि इस जनविरोधी आदेश पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए ताकि संकट में फंसे आमजन, किसानों और उद्यमियों को राहत मिल सके।

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