बारां: पंडित प्रभु जी नागर ने धतुरिया भागवत कथा में दिया भक्ति का संदेश
अंता के धतुरिया में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन संत प्रभु जी नागर ने संस्कारों, परिवार की मर्यादा और भक्ति के महत्व पर श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

बारां के धतुरिया गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते मालवा के गौ सेवक संत पंडित प्रभु जी नागर।
बारां/अंता।
भक्ति और कर्म का संदेश
मालवा के गौ सेवक संत पं.प्रभु जी नागर ने धतुरिया में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे सोपान में कहा कि भक्त भगवान से यही प्रार्थना करना कि—
"हे नाथ, जीवन रूपी नाव को मत पलटाना, तू बस हमारे भाव को पलटा देना। हम अच्छे कर्म करते हुये भक्ति की धारा से जुड़ें रहें।"
श्रद्धालुओं से सराबोर विराट पांडाल में उन्होंने कहा कि हमारी कंचन काया की तिजोरी भगवान के नाम से ही भरती है। मीरा बाई 'राम रतन धन पायो' के निरंतर जप से ही सब कुछ भूल गई थी। कोई चोर या यमदूत भी भक्ति बल के धन को नहीं छुड़ा पाया।
- जीवन के अंत में पंच तत्वों का शरीर ही बचता है।
- सारे रिश्ते खत्म हो जाते हैं।
- इसलिये निरंतर जप करने के लिये भागवत भक्ति से अवश्य जुडें़।
परिवार और संस्कारों की सीख
संत प्रभूजी नागर ने कहा कि "परिवार के मुखिया को सट्टा की जीत और बेटा की जिद कभी पूरी नहीं करना चाहिये।" जीवन में धर्म और संस्कृति की राह पर चलते हुये सदकार्य करते रहें। बच्चों में अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी आवश्यक हैं। किशोर उम्र में उनकी संगत अच्छी होगी तो वे मदिरा की जगह मंदिर की ओर कदम बढ़ायेंगे। भक्ति का उद्भव आपकी संगत से ही होता है।
भक्त के लिये नियम बदलते हैं भगवान
जीवन के अंत में भगवान का नाम और भगवान का भरोसा ही बचना चाहिये। यही मोक्ष है। भगवान पर कभी संशय मत रखना। गुरू और गोविंद दोनों में जिसने आपको जीते-जी निभाया है, वह अंत समय में भी निभायेगा।
"भक्त के काम के लिये भगवान अपने नियम बदल देता है। हमारे ऋषि-मुनि मानते हैं कि भक्तों के प्रबल प्रेम के पाले पड़कर प्रभू को भी नियम बदलते देखा है।"
ईमानदारी और संगठन का प्रेरक प्रसंग
एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुये पं.नागरजी ने कहा कि जिस तरह भोज में छोटी-मोटी नुक्ती एक दूसरे से मिलकर हजारों लोगों का भंडारा पूरा कर देती है, क्योंकि उसे सब तक पहुंचने के लिये ही बनाया गया था। फिर जो नुक्की बच गई उसे घर-घर बांट दो। यही ईमानदारी है।
- गांव में जब भी कोई अच्छा काम करने के लिये कोई समिति बनाई जाये उसमें ईमानदारी से जुडे़ं।
- झगड़ा करोगे तो आगे कोई साथ नहीं देगा।
- सबको नुक्ती की तरह मधुरता से जोड़े रखें।
महाआरती में गणमान्य जनों की उपस्थिति
अंत में विधायक प्रमोद जैन भाया, जिला प्रमुख श्रीमती उर्मिला जैन भाया एवं आयोजक पटेल हरिश्चंद्र नागर परिवार सहित हजारों श्रोताओं ने भागवत आरती की।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
