बारां: मनरेगा के वजूद को बचाने के लिए कांग्रेस का 'संग्राम', कलेक्ट्रेट पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष उपवास
बारां जिला मुख्यालय पर कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम जन आंदोलन' के तहत महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय उपवास किया। पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया और जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा बजट में कटौती और वैधानिक अधिकारों के हनन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस सत्याग्रह में जिले के तमाम दिग्गज कांग्रेस नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए।

बारां। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अस्तित्व पर मंडराते संकट और केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में रविवार को बारां जिला मुख्यालय पर सियासी हलचल तेज रही। 'मनरेगा बचाओ संग्राम जन आंदोलन' के आह्वान पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दिग्गज नेताओं ने जिला कलेक्ट्रेट परिसर स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय उपवास रखकर हुंकार भरी। यह विरोध प्रदर्शन न केवल योजना के बजट में कटौती के खिलाफ था, बल्कि उन मूलभूत सिद्धांतों की रक्षा के लिए भी था, जो ग्रामीण भारत को रोजगार की गारंटी देते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत कांग्रेस पदाधिकारियों द्वारा बापू की प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक माल्यार्पण के साथ हुई, जिसके बाद सत्याग्रह का यह सिलसिला दिनभर चला।
धरने को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री एवं अंता विधायक प्रमोद जैन भाया ने योजना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया यह कानून महज एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को काम का वैधानिक अधिकार देने वाला सुरक्षा कवच है। भाया ने जोर देकर कहा कि 15 दिनों के भीतर रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने की बाध्यता ही इस कानून की आत्मा है, जिसे वर्तमान सरकार कमजोर करने का प्रयास कर रही है। वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामचरण मीणा ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखते हुए कहा कि मनरेगा प्रतिवर्ष करोड़ों परिवारों का सहारा बनती है, जिससे न केवल पलायन रुकता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी संपत्तियों का निर्माण भी होता है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों की 60 प्रतिशत भागीदारी का हवाला देते हुए इसे सामाजिक सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताया।
जिला प्रमुख श्रीमती उर्मिला जैन भाया ने केंद्र सरकार की मंशा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बजट का सीमित आवंटन और कृषि सीजन के दौरान कार्य पर प्रतिबंध जैसे कदम सीधे तौर पर मजदूरों के दमन की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने के प्रयासों को श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के मूल्यों पर हमला करार दिया। पूर्व विधायक पानाचन्द मेघवाल ने तकनीकी और ढांचागत परिवर्तनों की आलोचना करते हुए कहा कि नए प्रावधानों से निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण हुआ है, जिससे ग्राम सभाएं और पंचायतें पंगु हो रही हैं। उन्होंने केंद्र के अंशदान में कमी को राज्यों और गरीब श्रमिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने की सोची-समझी रणनीति बताया।
इस व्यापक जन आंदोलन और उपवास कार्यक्रम में बारां नगर अध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज, पीसीसी सचिव हंसराज मीणा उदपुरिया, महिला जिलाध्यक्ष बृजेश वर्मा, सेवादल जिलाध्यक्ष शिवशंकर यादव और एससी प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष शिमला बैरवा ने सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही किशनगंज ब्लॉक अध्यक्ष अजीज नाजा, शाहबाद ब्लॉक अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव, मांगरोल ब्लॉक अध्यक्ष रामस्वरूप बैरवा, छीपाबड़ोद ब्लॉक अध्यक्ष मूलचंद शर्मा, नगर अध्यक्ष डॉ. इजहार खान सीमा, पूर्व चेयरमैन सीसवाली मोहम्मद इदरीश खान, जिपस प्रदीप काबरा, अर्ध घुमन्तु प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश भांड, तोलाराम मीणा, मण्डल अध्यक्ष योगेश नागर, सतीश शर्मा, अजय चौधरी और प्रेमचंद गुर्जर मानपुरा सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इस आंदोलन को एक निर्णायक स्वरूप प्रदान किया। यह उपवास केवल एक विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस के संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा।

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