कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ बारां ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज
बारां में कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए। ज्ञापन में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और निष्पक्ष जांच की मांग की गई।

तस्वीर में बारां जिला कलेक्ट्री परिसर के बाहर ज्ञापन सौंपने के बाद खड़े कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एडवोकेट लालसिंह मारन और अन्य अधिवक्ता व पदाधिकारी नजर आ रहे हैं।
बारां। देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के विरोध में कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ, जिला बारां के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने जिला कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एडवोकेट लालसिंह मारन के नेतृत्व में जिला कलेक्टर बारां के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया को विस्तृत ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में पेपर लीक, भ्रष्टाचार और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जोरदार मांग की गई। कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ ने बताया कि विगत वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं और नकल माफियाओं की सक्रियता के कई मामले सामने आए हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि इन घटनाओं से देश के लाखों मेहनती विद्यार्थियों और बेरोजगार युवाओं के वर्षों के सपने और मेहनत प्रभावित हुए हैं, जिससे उनमें निराशा, असुरक्षा और मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और बार-बार होने वाले विवादों एवं पेपर लीक की घटनाओं के चलते कई छात्र-छात्राओं द्वारा आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनकी उच्चस्तरीय समीक्षा और संबंधित लोगों की जवाबदेही तय किया जाना आवश्यक है।
कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि देशभर में हुए पेपर लीक और परीक्षा घोटालों की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच करवाई जाए। शिक्षा विभाग के भीतर हुई प्रशासनिक विफलताओं और अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय की जाए। ज्ञापन में कहा गया कि यदि जांच में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की प्रशासनिक जिम्मेदारी या लापरवाही साबित होती है तो उनके विरुद्ध विधि सम्मत एवं उचित कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, परीक्षा माफियाओं और उनके संरक्षकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की गई। साथ ही प्रभावित विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग रखी गई।
कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ ने यह भी मांग की कि परीक्षा संबंधी तनाव और विवादों के कारण आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के मामलों की निष्पक्ष जांच कर पात्र मामलों में उनके परिजनों को उचित आर्थिक सहायता और न्याय प्रदान करने पर विचार किया जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर कानून और प्रभावी प्रशासनिक तंत्र विकसित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
इसके अलावा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा और छात्र हितों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले छात्रों पर दर्ज आपराधिक प्रकरणों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की कार्रवाई करने की मांग की गई।
ज्ञापन देने वालों में जिला कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ बारां के अध्यक्ष एडवोकेट लाल सिंह मारन, पुर्व अध्यक्ष कृष्णकांत शर्मा एडवोकेट, धर्मेंद्रसिंह चैधरी जिला महामंत्री, सिमरनजीत सिंह, पिंकेश जगरवाल, सचिव मो. रईस हाशमी, हर्ष मेहरा, आतिफ हाशमी, तरुण नागर, गोपाल खीची, सचिव सुरेन्द्र कुमार मीना, सुरेश बैरवा, रामसिंह ऐरवाल, हिमांशु जैन, नोटेरी एडवोकेट जलीलु्रहमान, सचिव बृजमोहन गोयल, एडवोकेट राजन्ती मारण समेत दर्जनों अधिवक्तागण शामिल रहे।
कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ बारां द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्र हितों की सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।

