बारां: मनरेगा के वजूद पर संकट के खिलाफ कांग्रेस का शंखनाद, ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के जरिए केंद्र को घेरने की तैयारी
बारां में कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ ‘मनरेगा बचाओ संग्राम जन आंदोलन’ का आगाज किया है। विधायक प्रमोद जैन भाया और प्रभारी मीनाक्षी चंद्रावत ने मनरेगा के बजट में कटौती और वैधानिक गारंटी खत्म करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। 11 जनवरी को जिला कलेक्ट्रेट पर होने वाले एक दिवसीय उपवास और इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

बारां। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मूल स्वरूप के साथ हो रही छेड़छाड़ के विरोध में अब बारां जिला कांग्रेस कमेटी ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर बारां में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री एवं विधायक प्रमोद जैन भाया और प्रभारी मीनाक्षी चंद्रावत ने केंद्र सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए ‘मनरेगा बचाओ संग्राम जन आंदोलन’ का ऐलान किया। संगठन महामंत्री कैलाश जैन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, कांग्रेस इस आंदोलन के माध्यम से न केवल मनरेगा के वैधानिक अधिकारों की रक्षा करेगी, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के हक के लिए सड़क से लेकर शासन तक संघर्ष करेगी।
विधायक प्रमोद जैन भाया और पूर्व विधायक मीनाक्षी चंद्रावत ने इस दौरान संयुक्त रूप से कहा कि वर्ष 2005 में तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया मनरेगा महज एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की एक वैधानिक गारंटी है। कानूनन राज्य सरकारें 15 दिनों के भीतर रोजगार देने के लिए बाध्य हैं, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है। लेकिन केंद्र की वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा लाए गए नए अधिनियम के माध्यम से इस पूरे ढांचे को ध्वस्त करने का प्रयास किया जा रहा है। वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि केंद्र सरकार द्वारा मजदूरी अंशदान को 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत करना और निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण करना ग्राम सभाओं और पंचायतों को पंगु बनाने जैसा है। विशेषकर महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के लिए यह कानून एक संबल था, क्योंकि कुल कार्य दिवसों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत रहती है।
इस प्रेस वार्ता के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि महात्मा गांधी का नाम हटाना और बजट में कटौती करना श्रम की गरिमा पर सीधा प्रहार है। इस गंभीर संकट को देखते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है। इस कार्यक्रम के दौरान जिलाध्यक्ष रामचरण मीणा, जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया, पूर्व विधायक पानाचन्द मेघवाल, पूर्व विधायक करणसिंह राठौड़ और सेवादल अध्यक्ष शिवशंकर यादव सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुटता के साथ मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग दोहराई।
इसी संघर्ष की अगली कड़ी में 11 जनवरी, 2026 को जिला कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय शांतिपूर्वक उपवास का आयोजन किया जाएगा। इस उपवास कार्यक्रम में विधायक प्रमोद भाया, जिलाध्यक्ष रामचरण मीणा, जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया, पूर्व विधायक पानाचन्द मेघवाल, करणसिंह राठौड़, निर्मला सहरिया समेत प्रदेश पदाधिकारी, ब्लॉक एवं मंडल अध्यक्ष, सभी प्रकोष्ठों के पदाधिकारी, पूर्व एवं वर्तमान पार्षद और अग्रिम संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल होंगे। कांग्रेस का यह कदम ग्रामीण आजीविका पर हो रहे हमले के खिलाफ एक निर्णायक प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य हर हाल में काम के अधिकार की रक्षा करना है।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
