बारां: कलेक्टर की रात्रि चौपाल में पट्टे और पीएम आवास की सौगात
जिला कलेक्टर बालमुकुंद असावा ने मांगरोल के बमोरी कलां में ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और सहरिया परिवारों को आवास स्वीकृति पत्र व पट्टे सौंपे।

बारां जिला अंतर्गत मांगरोल पंचायत समिति की ग्राम पंचायत बमोरी कलां में आयोजित रात्रि चौपाल में ग्रामीणों को पीएम आवास योजना के स्वीकृति पत्र और सांकेतिक चाबी सौंपते जिला कलेक्टर श्री बालमुकुंद असावा (बाएं से तीसरे, चश्मा पहने हुए) व अन्य अधिकारी।
जिला प्रशासन और आमजन के बीच की दूरी को मिटाते हुए जिला कलेक्टर श्री बालमुकुंद असावा ने पंचायत समिति मांगरोल के ग्राम पंचायत बमोरी कलां में एक वृहद रात्रि चौपाल का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं को बेहद संजीदगी से सुना गया और मौके पर ही कई ऐतिहासिक एवं जनकल्याणकारी निर्णय लेकर उन्हें अमलीजामा पहनाया गया। जिला कलेक्टर की इस संवेदनशील पहल से न केवल ग्रामीण परिवेश की धड़कन माने जाने वाले अंतिम पायदान के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचा, बल्कि विकास की एक नई इबारत भी लिखी गई।
इस ऐतिहासिक रात्रि चौपाल के दौरान जिला कलेक्टर द्वारा विकास और जनकल्याण की चौतरफा बौछार की गई, जिसके तहत 3 ग्रामीणों को उनके हक के आवासीय पट्टे वितरित किए गए। वहीं, लंबे समय से अपने आशियाने का सपना संजोए बैठे 4 लाभार्थियों को आवास पूर्णता प्रमाण पत्र सौंपकर उन्हें गृह प्रवेश की खुशियां दी गईं। वंचित तबके को मुख्यधारा से जोड़ने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए पीएम आवास योजना के अंतर्गत 12 सहरिया परिवारों को मकान निर्माण हेतु धनराशि आवंटित करने के स्वीकृति पत्र सौंपे गए। इसके अतिरिक्त, कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के उद्देश्य से किसानों के लिए सिंचाई हेतु पाइप लाइन स्वीकृति का प्रमाण पत्र भी जारी किया गया, जिसने काश्तकारों के चेहरे पर मुस्कान ला दी।
प्रशासनिक दक्षता और दूरदर्शिता का परिचय देते हुए इस चौपाल में सहरिया परिवारों के पुनर्वास और विकास के लिए एक बड़ा कानूनी व आधिकारिक कदम उठाया गया। पीएम जन मन योजनान्तर्गत इन सहरिया परिवारों के आबादी विस्तार हेतु ग्राम बमोरी कलां की खसरा संख्या 1441, रकबा 3.25 हैक्टेयर बंजड़ भूमि में से 1.00 हैक्टेयर भूमि को राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम-1956 की धारा 92 के तहत ग्राम पंचायत बमोरी कलां को आरक्षित व सेट-अपार्ट किया गया। जिला कलेक्टर ने इस विधिक प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कड़े निर्देश दिए कि यह आरक्षित भूमि केवल और केवल आवास निर्माण हेतु ही उपयोग में लाई जाएगी तथा यह पूर्ण रूप से राज्य सरकार में ही निहित रहेगी।
ग्रामीण क्षेत्र की रीढ़ मानी जाने वाली बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर इस चौपाल में विशेष ध्यान केंद्रित रहा। ग्रामीणों ने मुख्य रूप से रास्ता निर्माण एवं मरम्मत, गंदे पानी की निकासी हेतु नाली की सफाई व नये नाले बनाने, सुगम आवागमन हेतु सड़क संपर्क स्थापित करने तथा स्वास्थ्य के अधिकार के तहत चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर करने की पुरजोर मांग उठाई। इन जनभावनाओं पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर श्री बालमुकुंद असावा ने संबंधित विभागों के आला अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि ग्राम में कच्चे रास्तों को अविलंब पक्का किया जाए, जलभराव की गंभीर समस्या को रोकने के लिए नालियों का निर्माण व नियमित सफाई सुनिश्चित हो, आवागमन में कोई बाधा न आए इसके लिए संपर्क मार्ग दुरुस्त किए जाएं तथा चिकित्सा सेवाओं को सुचारू रखने हेतु सीएचसी व पीएचसी पर डॉक्टरों की तैनाती के साथ-साथ जीवनरक्षक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक त्वरित कार्ययोजना बनाई जाए।
इसी कड़ी में, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बमोरी कलां के भवन निर्माण को लेकर गहरा जन-आक्रोश और जनभावनाएं भी खुलकर सामने आईं। ग्रामवासियों ने वर्तमान में चयनित किए गए भवन निर्माण स्थल पर कड़ा ऐतराज जताते हुए जिला कलेक्टर को बताया कि चयनित जगह गांव से काफी दूर, अत्यधिक गहराई में और डूब क्षेत्र में स्थित है, जिसके कारण बुजुर्गों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं का वहां तक पहुंचना अत्यंत दुष्कर व कष्टप्रद होगा। चौपाल में मौजूद लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीणों ने एक सुर में वर्तमान संचालित पीएचसी स्थल पर ही नए सीएचसी भवन का निर्माण कराने की वकालत की। जनहित सर्वोपरि के सिद्धांत को मानते हुए जिला कलेक्टर ने ग्रामीणों का मांग पत्र प्राप्त किया और संबंधित विभाग को इस पूरे मामले का जनहित में गहन परीक्षण कर नियमानुसार त्वरित कार्यवाही करने के आदेश दिए।
इस सघन जनसुनवाई के दौरान राशन नाला निर्माण में आ रही अड़चनों, पेयजल की भारी किल्लत, पीएम आवास योजना में सामने आई अनियमितताओं, सरकारी जमीनों से जबरन कब्जे हटवाने, विभिन्न रिहायशी इलाकों में पानी भराव की समस्या तथा नए शौचालय निर्माण सहित दर्जनों गंभीर प्रकरण ग्रामीणों द्वारा सीधे जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जिला कलेक्टर ने एक-एक कर सभी प्रकरणों को बेहद गंभीरता से लिया और मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके त्वरित और समयबद्ध निराकरण के सख्त निर्देश जारी किए।
इस जन-कल्याणकारी आयोजन के समापन पर जिला कलेक्टर ने रात्रि चौपाल की महत्ता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार के आयोजनों का मूल उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचाना और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित समाधान करना है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रशासन द्वारा उनकी सभी जायज मांगों और समस्याओं पर प्राथमिकता के आधार पर त्वरित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस विश्वास के साथ संपन्न हुई इस रात्रि चौपाल ने ग्रामीण विकास और सुशासन की दिशा में एक अमिट छाप छोड़ी है।

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