बारां/छबड़ा। विद्या भारती द्वारा संचालित मदनलाल भवानी शंकर गुप्त बालिका आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को विद्या भारती की बालिका शिक्षा इकाई के तत्वावधान में माता-पुत्री विचार संगोष्ठी का गरिमामय एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। राजेंद्र शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माताओं एवं पुत्रियों के मध्य आत्मीय संवाद स्थापित कर बालिकाओं के सर्वांगीण विकास और संस्कारयुक्त शिक्षा को प्रोत्साहित करना रहा। ऐसी संगोष्ठियां परिवार और विद्यालय के बीच सेतु का कार्य करती हैं, जिससे बालिकाओं में आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक चेतना का विकास होता है।

माता-पुत्री संवाद और मार्गदर्शन

विद्यालय की प्रधानाचार्य मनोरमा शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि संगोष्ठी के दौरान माताओं और पुत्रियों ने खुलकर अपने विचार व्यक्त किए, अनुभव साझा किए तथा पारिवारिक संवाद, संस्कार और शिक्षा के महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता मृदुला जैन ने अपने संबोधन में कहा कि "मां ही बालिका की प्रथम गुरु होती है। यदि घर से उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो बेटियां हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित कर सकती हैं।" उन्होंने बालिका शिक्षा को समाज के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताया।





महिला सशक्तिकरण और सामाजिक चेतना

कार्यक्रम की अध्यक्षता शकुंतला मादावत ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में इस बात पर जोर दिया कि "बालिकाओं को सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है तथा ऐसे आयोजन उन्हें आत्मनिर्भर एवं जागरूक बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।" यह कार्यक्रम भावनात्मक, प्रेरक एवं मार्गदर्शक वातावरण में सम्पन्न हुआ जिसमें विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। अंततः यह आयोजन बालिका शिक्षा को नई दिशा प्रदान करने वाला सिद्ध हुआ।

Pratahkal Bureau

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