गुगोर ग्रामीण सेवा शिविर में अधिकारी नहीं पहुंचे, 2000 ग्रामीण लौटे खाली हाथ, कार्रवाई की मांग तेज
बारां के गुगोर ग्रामीण सेवा शिविर में अधिकारियों की अनुपस्थिति से 1500 से 2000 ग्रामीणों को निराश लौटना पड़ा। सरपंच ने जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।

तस्वीर में एक सरकारी कार्यालय के भीतर कुछ लोग एक मेज के पीछे खड़े होकर हाथ में एक दस्तावेज थामे हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसके पृष्ठभूमि में 'ग्रामीण सेवा शिविर 2026' का एक बैनर लगा है।
बारां जिले की छबड़ा तहसील स्थित ग्राम पंचायत गुगोर में आयोजित राज्य सरकार के ग्रामीण सेवा शिविर की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिविर में उपखंड स्तर के अधिकारियों के नहीं पहुंचने से करीब 1500 से 2000 ग्रामीणों को बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा। मामले से नाराज सरपंच राजेंद्र खारोल ने मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर, सांसद और क्षेत्रीय विधायक को शिकायत पत्र भेजकर जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जांच की मांग की है।
राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 8 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत गुगोर में ग्रामीण सेवा शिविर आयोजित किया गया था। सरपंच राजेंद्र खारोल के अनुसार सुबह 10 बजे से ही करीब 1500 से 2000 ग्रामीण राजस्व, पेंशन, पट्टा और अन्य लंबित कार्यों के समाधान की उम्मीद लेकर शिविर में पहुंचे थे।
ग्रामीणों की उम्मीद उस समय टूट गई जब पंचायत समिति विकास अधिकारी सहित कोई भी उपखंड स्तरीय अधिकारी शिविर में नहीं पहुंचा। अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण अधिकांश ग्रामीणों के कार्य नहीं हो सके और उन्हें पूरे दिन इंतजार करने के बाद निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
सरपंच राजेंद्र खारोल का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण ग्रामीणों का समय और मजदूरी दोनों बर्बाद हुए। उनका कहना है कि शिविर के आयोजन पर खर्च हुआ सरकारी धन भी व्यर्थ गया तथा इस पूरे घटनाक्रम से राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं और प्रशासनिक छवि को भी नुकसान पहुंचा है।
सरपंच ने मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर, सांसद और क्षेत्रीय विधायक को भेजे गए शिकायत पत्र में पूरे मामले की विभागीय जांच कराते हुए 24 घंटे के भीतर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन सहित कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति इसी तरह की लापरवाही देखने को मिल सकती है।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार और जिला प्रशासन शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं तथा ग्रामीणों की नाराजगी दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

Pratahkal Bureau
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