बारां। श्वेताम्बर जैन समाज के अध्यक्ष राजेन्द्र रंगावत, ललित श्रीमाल और विजया श्रीमाल ने जानकारी दी कि चन्द्रप्रभू जैन मंदिर पर चल रहे पावन ओली पर्व के आठवें दिवस के लाभार्थी प्रमोद जैन भाया, यश जैन भाया, पारख कोठारी तथा अशोक बोरडिया एवं गौत्तम बोरडिया परिवारगण रहे। राजेंद्र शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, यह दिन तप, संयम और आत्मशुद्धि की साधना का दिन है जो जैन समाज में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

साधना और आत्मशुद्धि का विशेष महत्व

बुधवार को ओली पर्व के आठवें दिवस पर अर्चना श्रीजी एवं यशोगुणा श्री जी महाराज सा. ने अपने संबोधन में बताया कि "समाज में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाए जा रहे ओली पर्व के आठवें दिन का धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह दिन तप, संयम और आत्मशुद्धि की साधना को और अधिक दृढ़ करने का प्रतीक माना जाता है।" महाराज सा. ने आगे स्पष्ट किया कि ओली पर्व के अंतर्गत श्रद्धालु नौ दिनों तक विशेष तपस्या, आयंबिल व्रत, एकासन तथा संयमित आहार-विहार का पालन करते हैं।

सम्यक चरित्र पद: मोक्ष मार्ग का आधार

चन्द्रप्रभू महिला मण्डल अध्यक्ष एवं जिला प्रमुख श्रीमती उर्मिला जैन भाया, श्रीमती विजया श्रीमाल तथा नवयुवक मण्डल सचिव राहुल मारू और चेतना श्रीमाल ने बताया कि नवपद ओली का आठवां पद श्री सम्यक चरित्र पद है। यह पद मोक्ष मार्ग के तीन रत्नों- दर्शन, ज्ञान और चरित्र में से तीसरा और अंतिम है। आठवां दिन इस साधना के अंतिम चरणों में से एक होता है, जिसमें साधक अपनी तपस्या को और अधिक गहन करते हुए आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि की ओर अग्रसर होते हैं।

तपस्या और वैराग्य का संदेश

जैन धर्माचार्यों के अनुसार, इस दिन साधकों को मन, वचन और काया की शुद्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यह दिन आत्मबल को मजबूत करने तथा सांसारिक आसक्तियों से विरक्ति का संदेश देता है। चन्द्रप्रभू जैन मंदिर पर आयोजित इस नौ दिवसीय ओली पर्व के आठवें दिवस पर सभी धार्मिक कार्यक्रम हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुए।

Pratahkal Bureau

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