बारां। चन्द्रप्रभू जैन मंदिर के अध्यक्ष राजेन्द्र रंगावत, चन्द्रप्रभू महिला मण्डल अध्यक्ष एवं जिला प्रमुख श्रीमती उर्मिला जैन भाया तथा चन्द्रप्रभु नवयुवक मण्डल के सचिव राहुल मारू ने बताया कि परमपूज्य आगमोद्वारक आचार्य श्री आनन्दसागर सूरिष्वर जी महाराज साहब के समुदायवर्ती परमपूज्या अमितगुणा श्रीजी म.सा. की सुषिष्याएं परमपूज्या अर्चना श्रीजी म.सा. एवं परमपूज्या यषोगुणा श्रीजी म.सा. के पावन सानिध्य में चैत्री ओेली की पावन आराधना सप्तमी बुधवार के दिन चन्द्रप्रभू जैन मंदिर में प्रारम्भ हुई। इस धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत प्रातः काल व्याख्यान का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसके पष्चात क्रिया, आयंबिल तथा शाम को प्रतिक्रमण की विधि सम्पन्न हुई।

नवपद आराधना का आध्यात्मिक महत्व और व्याख्यान

व्याख्यान के दौरान परमपूज्या अर्चना श्रीजी म.सा. ने अरिहंत, सिद्व, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक दर्षन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र और सम्यक तप रूपी नवपद आराधना का गूढ़ महत्व समझाया। उन्होंने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि "श्री जिनेष्वरों द्वारा प्ररूपित धर्म में यह नवपद सारभूत है इसलिए यह कल्याण के कारणरूप है तथा ये विधिपूर्वक आराधना करने योग्य है।" महाराज साहब ने आगे प्रेरणा देते हुए कहा कि "इन नवपदों से सिद्व बने हुए ऐसे सिद्वचक्र की उपासना करने वाले मनुष्य श्रीपाल महाराजा की भांति सभी रोगों और दुखों से मुक्त होकर सुख पाते है।"

आयंबिल तपस्या के लाभार्थी और समाज की सहभागिता

विजय श्रीमाल एवं ललित श्रीमाल ने जानकारी देते हुए बताया कि आराधना के इस पावन अवसर पर आज कुल 24 आयंबिल की तपस्या रही। इस पुनीत कार्य के लाभार्थी प्रमोद जैन भाया, श्रीमती उर्मिला जैन भाया, यश जैन भाया तथा भरत कुमार, अषोक कुमार, सुरेष कुमार बोरडिया परिवार रहे। चन्द्रप्रभू जैन मंदिर में आयोजित इस भक्तिमय कार्यक्रम में सभी स्थानक मंदिर एवं समस्त जैन समाज उपस्थित रहा।

Pratahkal Bureau

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