बारां: तीन दशक बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे नागरिक, बिजली-पानी का संकट गहराया
जिला बनने के 33 साल बाद भी बारां में बुनियादी ढांचे का अभाव है, जहां भीषण गर्मी में बिजली कटौती और पेयजल की किल्लत से जनता परेशान है।

बारां। नेता और अफसर विकास के लाख दावे करें, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बारां शहर में न तो बिजली की व्यवस्था परिपूर्ण है और न ही पेयजल आपूर्ति पर्याप्त है। कहने को तो जनप्रतिनिधि जनता के सामने सिर हिलाकर, मुस्कुराकर और हाथ जोड़कर हर समस्या के समाधान की हामी भरते हैं, परंतु स्थितियां ठीक इसके विपरीत बनी हुई हैं। बारां को सन 1991 में जिला बनाया गया था, लेकिन विडंबना यह है कि तीन दशक बाद आज भी यहां के नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब तक जितने भी जनप्रतिनिधि चुने गए, उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति कभी विकास की रफ्तार नहीं पकड़ पाई, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है। वास्तविकता यह है कि बिना ठोस नियोजन के सिर्फ कागजी योजनाओं का क्रियान्वयन होने से शहर का बुनियादी ढांचा आज तक व्यवस्थित नहीं हो पाया है।
बिजली विभाग द्वारा आए दिन अलग-अलग बस्तियों में चरणबद्ध तरीके से घंटों शटडाउन लेकर कहीं ट्रांसफार्मर तो कहीं केबल बदली जाती है, लेकिन इतनी कवायद के बाद भी विद्युत व्यवस्था मुकम्मल नहीं हो पाती। दूसरी ओर, जलदाय विभाग नई पाइपलाइन डालने के दावे तो करता है, पर धरातल पर विभाग पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। बढ़ती आबादी के साथ शहर का विस्तार तो हुआ, लेकिन पेयजल स्टोरेज के लिए टंकियों का अभाव बना हुआ है। भीषण गर्मी में जनता को राहत देने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा राज्य सरकार से नई टंकियों के निर्माण की स्वीकृति लेने के गंभीर प्रयास नहीं किए गए। वर्तमान में कोटा रोड स्थित न्यू सिविल लाइंस सहित शहर की अन्य पॉश कॉलोनियों, बस्तियों और वार्डों में नागरिक बूंद-बूंद पानी और बिजली के लिए त्रस्त हैं।
पिछले तीन-चार दिनों से पेयजल सप्लाई अत्यधिक बाधित है और कई इलाकों में तो पानी का वितरण तक नहीं हुआ है। इस संकट पर जलदाय विभाग का तर्क है कि हाल ही में आए तेज आंधी-तूफान व वर्षा के कारण विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे मुख्य स्रोत हीकड़ और माजरावता की मोटरें नहीं चल पा रही हैं। वहीं, विद्युत विभाग जल्द ही आपूर्ति सुचारु करने का आश्वासन दे रहा है। कुल मिलाकर, तंत्र की इस विफलता ने आम जनता को बेबस कर दिया है और बुनियादी सुविधाओं का यह अभाव जिम्मेदारों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
