बारां जिले में झूठी रिपोर्ट दर्ज कराकर एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग का गंभीर आरोप सामने आया है। झालावाड़ रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी और शनि देव मंदिर के पुजारी राजेश कुमार पुत्र छोटूलाल जोशी ने एक महिला पर लगातार झूठे प्रकरण दर्ज कराने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को न्याय की मांग को लेकर परिवाद सौंपा है।

परिवाद में राजेश कुमार जोशी ने बताया कि उनके मकान के पीछे रहने वाली महिला अनिता बैरवा आए दिन किसी न किसी बात को लेकर विवाद करती रहती है। उनका आरोप है कि जब वे अपने मकान के पीछे बने गेट को खोलते हैं तो अनिता बैरवा इसका विरोध करती है और कहती है कि पीछे की ओर उनका कोई रास्ता नहीं है। पीड़ित के अनुसार महिला ने कई बार धमकी दी कि यदि पीछे का दरवाजा बंद नहीं किया गया तो वह उन्हें झूठे मामलों में जेल भिजवा देगी। इतना ही नहीं, मकान में सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को तोड़ने का प्रयास महिला के पति द्वारा किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

राजेश कुमार जोशी ने बताया कि 27 अक्टूबर को महिला द्वारा रोड धोने के बहाने पानी व्यर्थ बहाया गया, जिससे उनके मकान में सीलन आ गई और नींव में बड़े गड्ढे हो गए। इसी बात को लेकर हुए विवाद के बाद महिला ने पुलिस थाना जाकर एससी-एसटी एक्ट की धारा तीन और आईपीसी की धारा 354 के तहत मुकदमा दर्ज करवा दिया। पीड़ित का कहना है कि पुलिस जांच में यह मामला झूठा पाया गया, इसके बावजूद महिला लगातार थाने में नए-नए मुकदमे दर्ज कराने से नहीं चूक रही है।

पीड़ित ने बताया कि अब उन्होंने महिला से कोई बातचीत भी बंद कर दी है, फिर भी उनके परिवार का जीवन भय और तनाव के साए में गुजर रहा है। उनका आरोप है कि महिला के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस उन्हें ही परेशान कर रही है। 57 वर्षीय राजेश कुमार जोशी श्वास संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं और उनका एक बच्चा मानसिक रूप से विकलांग है। लगातार विवाद, धमकियों और पुलिस कार्रवाई के भय के कारण वे कई बार डिप्रेशन में चले गए, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें राजकीय चिकित्सालय के मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। स्वास्थ्य में सुधार न होने पर उन्हें बारां जिला चिकित्सालय से कोटा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

राजेश कुमार जोशी शनि देव मंदिर के पास पूजा-प्रसाद की दुकान लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका कहना है कि महिला द्वारा जिला एवं पुलिस प्रशासन को गुमराह कर एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग किया जा रहा है। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। पीड़ित की मांग है कि उनके मकान के पीछे का गेट खुलवाया जाए और बार-बार झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें और उनके परिवार को मानसिक, सामाजिक और कानूनी उत्पीड़न से राहत मिल सके।

Pratahkal Bureau

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