आज़ाद हिन्द फौज और 1946 के सैन्य विद्रोह पर बारां में व्याख्यान आयोजित
इतिहास संकलन समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्वतंत्रता आंदोलन में सैन्य क्रांतियों और भारतीय ज्ञान परम्परा की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला।

बारां के भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में आयोजित व्याख्यान के दौरान मंचासीन मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. मोहनलाल साहू, मुख्य वक्ता प्रो. मधुर मोहन रंगा और अन्य अतिथिगण।
बारां। इतिहास संकलन समिति के तत्वावधान में भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में व्याख्यान एवं परिसंवाद विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा में वैज्ञानिक समृद्धता और स्वतंत्रता आंदोलन में 1945-46 की सैन्य क्रांतियों की भूमिका पर इतिहासवेत्ताओं ने विस्तार से जानकारी साझा की।
भारतीय ज्ञान परम्परा और नई शिक्षा नीति
मुख्य वक्ता प्रोफेसर मधुर मोहन रंगा, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, पर्यावरण विज्ञान विभाग ने अपने संबोधन में बताया कि "भारतीय ज्ञान परम्परा में संतों और गुरूकुल के आचार्यों का ज्ञान पूर्णतः वैज्ञानिक समृद्धता पर आधारित था।" उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि "वर्तमान में केन्द्र सरकार की नई शिक्षा नीति ज्ञान आधारित कौशल विकास और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।"
सैन्य क्रांतियां और आज़ाद हिन्द फौज का प्रभाव
मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ. मोहनलाल साहू, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना ने इतिहास के महत्वपूर्ण पन्नों को खोलते हुए बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन में 1945-46 की सैन्य क्रांतियों ने देशव्यापी जनजागरण का कार्य किया। 1942 को द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने वाले भारतीय युद्ध बंदियों और पूर्वी एशिया में रहने वाले भारतीयों से आज़ाद हिन्द फौज का गठन हुआ था। आज़ाद हिंद की प्रेरणा और आज़ाद हिंद के बंदियों पर ब्रिटिश अत्याचार की प्रतिक्रिया स्वरूप 1946 में व्यापक स्तर पर सैनिक क्रांतियाँ हुईं।
अंग्रेजों में भय और सेना का विद्रोह
डॉ. साहू ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि 22 जनवरी 1946 को एयर फोर्स के भारतीय सैनिकों से विद्रोह की शुरुआत हुई जिनकी संख्या 50 हज़ार थी। इसके पश्चात 18 फ़रवरी को नौसेना के 78 जहाज़ों में सैनिक क्रांतियाँ हुईं और 26 फ़रवरी को स्थल सेना ने भी विरोध का बिगुल बजा दिया। इन घटनाओं से अंग्रेज़ों को यह आशंका हो गई थी की कहीं स्वतंत्र भारत का नेतृत्व आज़ाद हिंद फौज के पास नहीं चला जाए।
सनातनी इतिहास का पुनरुद्धार
विशिष्ट अतिथि डॉ. बाबूलाल भाट, प्रांतीय उपाध्यक्ष, चित्तौड़ प्रांत ने वैचारिक पक्ष रखते हुए बताया कि "विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम का भाव सनातन संस्कृति का प्रतीक रहा है, परन्तु यूरोपीय इतिहासकारों ने सनातनी इतिहास को ग़लत दिशा दी है।" उन्होंने बताया कि अब इसे भारतीय इतिहास संकलन समिति के इतिहासकारों द्वारा प्रमाणित रूप से तैयार किया जा रहा है। उनके अनुसार "शास्त्र के साथ शस्त्र का प्रयोग भी समय और परिस्थिति के अनुसार आवश्यक है।"
कार्यक्रम का सफल आयोजन
कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रोफेसर डॉ. आदित्य कुमार गुप्त, अध्यक्ष भारतीय इतिहास संकलन समिति, कोटा द्वारा किया गया। इस भव्य आयोजन में नवनीत स्वरूप, जिला महामंत्री इतिहास संकलन समिति कोटा, डॉ. सावित्री चौधरी, प्राचार्य भाशिप्र महाविद्यालय, प्रोफेसर डी.पी. त्रिपाठी, प्रोफेसर जे.पी. चौधरी, प्रो. सुव्रत शर्मा तथा भारतीय इतिहास संकलन समिति इकाई बारां के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार मेघवाल का विशेष सहयोग रहा। इस व्याख्यान और परिसंवाद कार्यक्रम में कोटा संभाग की सभी इकाइयों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
