बारां में आयुर्वेद का शंखनाद: असाध्य रोगों से मिलेगी मुक्ति, 10 दिवसीय निशुल्क क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा शिविर का भव्य आगाज
बारां में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत 10 दिवसीय निशुल्क आयुर्वेद क्षारसूत्र चिकित्सा शिविर का शुभारंभ हुआ। उप जिला प्रमुख छीतरलाल पारलिया और विशेषज्ञों की उपस्थिति में शुरू हुए इस शिविर में पाइल्स, भगंदर और अन्य असाध्य रोगों का प्राचीन भारतीय पद्धति से निशुल्क इलाज किया जा रहा है। रोगियों के लिए रहने, खाने और दवाओं की मुफ्त व्यवस्था है।

राजेंद्र शर्मा, बारां। आधुनिकता की चकाचौंध और अंग्रेजी दवाओं के बढ़ते वर्चस्व के बीच भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने एक बार फिर अपनी अचूक शक्ति का लोहा मनवाया है। राजस्थान के बारां जिले में स्वास्थ्य क्रांति का एक नया अध्याय शुरू हुआ है, जहाँ जड़ से बीमारियों को मिटाने के संकल्प के साथ 'निशुल्क आयुर्वेद अंतरंग क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा शिविर' का शंखनाद किया गया। फल मंडी के समीप अग्रवाल सेवा सदन में आयोजित इस गरिमामय समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि जिन रोगों के सामने आधुनिक विज्ञान कभी-कभी बेबस नजर आता है, उनका स्थायी समाधान हमारे वेदों और प्राचीन संहिताओं में आज भी सुरक्षित है। राष्ट्रीय आयुष मिशन और आयुर्वेद विभाग राजस्थान के इस संयुक्त प्रयास ने बारां की धरा पर हजारों रोगियों के लिए नई उम्मीद की किरण जगाई है।
इस भव्य आयोजन का उद्घाटन गुरुवार को मुख्य अतिथि उप जिला प्रमुख छीतरलाल पारलिया द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिला महामंत्री महावीर सिंह हाड़ा ने की। आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरी की पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुए इस शिविर में विशेषज्ञों की एक लंबी कतार मौजूद रही। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. जितेंद्र सिंह हाड़ा, सर्जन कौशल गौतम, गोविंद मीणा और डॉ. अजय नागर ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। मुख्य अतिथि पारलिया ने जनसमूह को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में कहा कि भले ही आज की दुनिया आधुनिक चिकित्सा के पीछे भाग रही हो, लेकिन भारतीय पद्धतियों का महत्व रत्ती भर भी कम नहीं हुआ है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर आयुर्वेद को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने के लिए कटिबद्ध हैं।
शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए आयुर्वेद विभाग के उप निदेशक वीरेंद्रकुमार सोहाया ने बताया कि यह शिविर मात्र परामर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ पाइल्स, फिशर और भगंदर जैसे कष्टकारी रोगों का क्षारसूत्र पद्धति द्वारा सफल ऑपरेशन किया जाएगा। चिकित्सा जगत में क्षारसूत्र को शल्य क्रिया का सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता है। शिविर प्रभारी डॉ. कमलेश कंवरिया के अनुसार, आगामी 31 जनवरी तक चलने वाले इस शिविर में सुबह 10 से शाम 4 बजे तक विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। विशेष रूप से महिला रोगियों की गोपनीयता और सुविधा के लिए अलग वार्ड और महिला चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है, जो इस आयोजन की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
शिविर की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ केवल सर्जरी ही नहीं, बल्कि प्रमेह, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, चर्म रोग, गठिया, जोड़ों का दर्द और श्वास रोगों का उपचार पंचकर्म, अग्निकर्म और योग जैसी पद्धतियों से किया जा रहा है। बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 'स्वर्ण प्राशन' की व्यवस्था भी की गई है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिविर में भर्ती होने वाले रोगियों के लिए आवास, भोजन और औषधियां पूर्णतः निशुल्क हैं। यह आयोजन केवल एक चिकित्सा शिविर नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का वह महायज्ञ है, जो बारां के नागरिकों को एक स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन की ओर अग्रसर करेगा।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
