बारां में लोकतंत्र पर प्रहार: SIR प्रक्रिया के नाम पर 'वोटर लिस्ट' से छेड़छाड़ का सनसनीखेज आरोप
बारां में SIR प्रक्रिया को लेकर छिड़ा सियासी संग्राम! कांग्रेस नेता शाहिद इकबाल भाटी ने लगाया लोकतंत्र पर हमले का आरोप। फर्जी आपत्तियों के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश का पर्दाफाश। जाकिर मंसूरी, शाहिद कुंडी और सत्येन्द्र कुमार गोयल ने की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग। जानें क्या है पूरा विवाद और क्यों खतरे में है चुनावी पारदर्शिता।

बारां। राजस्थान के बारां जिले में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम को लेकर मचे घमासान ने अब राजनीतिक युद्ध का रूप ले लिया है। कांग्रेस खेल प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष शाहिद इकबाल भाटी ने इस पूरी प्रक्रिया को लोकतंत्र पर एक सुनियोजित हमला करार देते हुए सनसनी फैला दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि SIR की आड़ में संवैधानिक अधिकारों को कुचलने की गहरी साजिश रची जा रही है, जिससे चुनावी पारदर्शिता पूरी तरह खतरे में पड़ गई है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू भारी संख्या में दर्ज की गई 'ऑफलाइन आपत्तियां' हैं। भाटी का दावा है कि नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वैध मतदाताओं के नाम काटने का खेल खेला जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर सत्ता पक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि भाजपा से जुड़े कुछ बूथ लेवल कार्यकर्ता फर्जी आपत्तियां दर्ज कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। निर्वाचन आयोग के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि एक बीएलओ एक दिन में 10 से अधिक आपत्तियां दर्ज नहीं कर सकता, किंतु बारां में इन नियमों को ताक पर रखकर लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस विवाद की गूंज कांग्रेस के अन्य दिग्गजों के बयानों में भी सुनाई दी। जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस कमेटी बारां, जाकिर मंसूरी ने इस घटनाक्रम को चुनावी शुचिता पर सीधा प्रहार बताया। वहीं, कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व जिलाध्यक्ष शाहिद कुंडी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के माध्यम से विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों के मताधिकार को निशाना बनाया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। प्रदेश सचिव कांग्रेस खेल प्रकोष्ठ सत्येन्द्र कुमार गोयल ने भी सुर में सुर मिलाते हुए इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग बुलंद की है।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे संविधान और आम जनता के वोटिंग अधिकार की रक्षा के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करेंगे। मामला अब प्रशासन के पाले में है, जहाँ एक ओर स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी ओर मतदाता अधिकारों की सुरक्षा को लेकर जनता के बीच भारी असमंजस और आक्रोश की स्थिति बनी हुई है। यह विवाद न केवल बारां की स्थानीय राजनीति बल्कि आने वाले चुनावों की निष्पक्षता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

Pratahkal Bureau
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