अल्का सेन की मौत पर आशा सहयोगिनी संघ का प्रदर्शन, 25 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी सहित नौ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन
बारां में आशा सहयोगिनी कर्मचारी संघ ने दिवंगत अल्का सेन को न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संघ ने 25 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और नौ सूत्रीय मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी।

तस्वीर में बारां में आशा सहयोगिनी कर्मचारी संघ की महिलाएं जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपती हुई नजर आ रही हैं।
बारां में आशा सहयोगिनी कर्मचारी संघ, जिला-बारां ने दिवंगत आशा सहयोगिनी अल्का सेन को न्याय दिलाने, उनके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने सहित नौ सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन जिलाध्यक्ष इन्द्रा कुमारी सुमन एवं महामंत्री ममता तलेटिया के नेतृत्व में दिया गया। ज्ञापन सौंपने से पहले संघ की ओर से अल्का सेन को दो मिनट का मौन रखकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
ज्ञापन में बताया गया कि 28 जुलाई 2026, मंगलवार को सुबह 4.30 बजे राजसमंद जिले के कांकड़ोली क्षेत्र में अल्का सेन (पत्नी देवीलाल सेन), जो आंगनबाड़ी केन्द्र मेणिया, ग्राम पंचायत साड़ड़ी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सांखेरा, ब्लॉक रेलमगरा, जिला राजसमंद में आशा सहयोगिनी के पद पर कार्यरत थीं, सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं। संघ के अनुसार अल्का सेन 27 जुलाई 2026, सोमवार को अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दो एचएआरपी हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं को आर.के. जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद प्रसव होने पर घर लौट रही थीं। इसी दौरान ट्रेलर की चपेट में आने से उनकी अकाल मृत्यु हो गई।
जिलाध्यक्ष इन्द्रा कुमारी सुमन ने कहा कि गरीब परिवार से जुड़ी दिवंगत आशा सहयोगिनी के सम्मान में एकमुश्त 25 लाख रुपये का आर्थिक सहायता पैकेज दिया जाए तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देकर राजस्थान सरकार न्याय प्रदान करे। उन्होंने राजस्थान की सभी आशा सहयोगिनियों को दबावमुक्त करने और सभी चिकित्सा संस्थानों में रात्रि विश्राम की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में जीरो पॉइंट पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आशा सहयोगिनियों को कड़ी मेहनत, लगन और ईमानदारी के बावजूद मात्र 4959 रुपये प्रतिमाह अल्प मानदेय मिलता है, जबकि वे 24 घंटे कार्य को प्राथमिकता देती हैं। संघ का कहना है कि पिछले कई वर्षों से दूर-दराज के क्षेत्रों सहित अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सेवाएं देते समय आशा सहयोगिनियां लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रही हैं।
संघ द्वारा दिए गए दूसरे ज्ञापन में मांग की गई कि आशा सहयोगिनी को स्वेच्छिक मानदेय कर्मी के बजाय स्थायी राज्यकर्मी बनाया जाए तथा राज्य के अन्य सरकारी कर्मचारियों की भांति सभी परिलाभ दिए जाएं। इसके साथ ही आशा सहयोगिनी को संविदा कैडर रूल 2022 में शामिल करने, श्रम एक्ट कानून के अनुसार उच्च कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी 1035 रुपये प्रतिदिन की दर से मासिक मानदेय निर्धारित करने, अनुभव के आधार पर महिला पर्यवेक्षक, एएनएम एवं अन्य उच्च पदों पर पदोन्नति देने तथा प्रतिवर्ष कम से कम 25 प्रतिशत मानदेय वृद्धि की मांग भी रखी गई।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि आशा सहयोगिनी के सेवानिवृत्ति पर ससम्मान 25 लाख रुपये का एकमुश्त पैकेज, कम से कम 15 हजार रुपये मासिक पेंशन तथा आरजीएचएस का लाभ दिया जाए। बीमारी अथवा दुर्घटना में मृत्यु होने पर 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जाए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को तीन गुना किया जाए तथा निजी चिकित्सा संस्थानों में संस्थागत प्रसव पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को पुनः शुरू कर पूर्व की समस्त बकाया प्रोत्साहन राशि का एक साथ भुगतान किया जाए। साथ ही आशा सहयोगिनी की ड्रेस बदलकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारियों की तरह सफेद एप्रिन किए जाने की भी मांग उठाई गई।
संघ ने मुख्यमंत्री से मांगों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए दिवंगत अल्का सेन के परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देकर राहत प्रदान करने की अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में उपाध्यक्ष सीमा रानी, ललीता यादव, हेमलता मेहरा, तस्वीर बाई मीणा, कलावती सुमन, सुनिता मीणा, मालती मेघवाल, संतोष सेन, साधना, मनभर वैष्णव, सावित्री गोचर, कविता मालव, गीता बाई सहित जिलेभर की आशा सहयोगिनी कर्मचारी संघ की महिलाएं शामिल रहीं।

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