बारां। आर्य समाज द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ, जिसमें वीर बाल दिवस और ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रगीत की 150वीं जयंती पर विशेष आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आर्य समाज के सदस्यों की उपस्थिति में 21 दिसंबर से 28 दिसंबर तक मनाया गया और देशभक्ति एवं धर्म के प्रति समर्पण की भावना से ओत-प्रोत रहा।

कार्यक्रम में प्रधान पुरूषोत्तम शर्मा ने दसवें गुरू गोविंद सिंह महाराज के चारों साहिबजादों के बलिदान की प्रेरक घटनाओं को विस्तार से बताया। उन्होंने विशेष रूप से जोरावर सिंह और फतेह सिंह के अदम्य साहस और धर्म के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा पर प्रकाश डाला। प्रधान शर्मा ने बताया कि दोनों पुत्रों ने किसी भी परिस्थिति में भय, लोभ या कामनाओं से प्रभावित हुए बिना सत्य का पालन किया। उनके बलिदान की परिणति चमकोट दुर्ग में युद्ध करते हुए शहीद होने के रूप में हुई। इस प्रकार 21 दिसंबर से 27 दिसंबर तक गुरू गोविंद सिंह का परिवार देश और धर्म के लिए बलिदान की सर्वोच्च मिसाल कायम करता रहा।

कार्यक्रम में समाज के सदस्य हेमेंद्र विजय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए ऋषि दयानंद के अनुयायी एवं उत्तराधिकारी महात्मा स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के बलिदान को याद किया। उन्होंने बताया कि स्वामी श्रद्धानंद ने रोलेक्ट एक्ट के विरोध में स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंग्रेजों की संगीन शक्तियों के सामने निर्भीक होकर खड़े रहे। उन्होंने गुरूकुल कांगड़ी की स्थापना कर युवाओं के चरित्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया। अंग्रेजों की पुलिस द्वारा उनसे पूछे जाने पर कि “तुम यहाँ बम बनाते हो?”, स्वामी श्रद्धानंद ने गुरूकुल के पुस्तकालय में रखी पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ को दिखाते हुए कहा, “यही मेरा बम है।”

28 दिसंबर को ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रगीत की 150वीं जयंती पर विशेष आयोजन किया गया। बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनंदमठ’ के माध्यम से यह गीत पूरे देश में प्रसिद्ध हुआ और क्रांतिकारियों द्वारा देशभक्ति के प्रतीक स्वरूप अपने प्राणों का उत्सर्ग किया गया। इस गीत को गाते हुए आर्य समाज का त्रिदिवसीय कार्यक्रम भव्य रूप से समापन हुआ।

इस अवसर पर समाज के कई वरिष्ठ सदस्य उपस्थित थे, जिनमें गजानंद मेहता, सूर्यप्रकाश विजय, हेमेंद्र विजय उपप्रधान, भवानीशंकर नागर कोषाध्यक्ष, देवेंद्र राठौर, मुकेश नामदेव, राकेश नामदेव, उदयप्रकाश त्यागी, लालचंद नागर, नेमीचंद नागर, तपस्या नामदेव, पूनम नामदेव, बृजमोहन गौड और श्याम सरोया शामिल थे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति और धर्मपरायणता की प्रेरक छवि के साथ हुआ।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

Next Story