अरावली संरक्षण यात्रा: सीकर में 23 फरवरी को नीलम आहलुवालिया का संवाद
पर्यावरण संरक्षण और अवैध खनन के खिलाफ चार राज्यों में 700 किमी लंबी जनजागृति यात्रा का आयोजन, 2 मार्च को दिल्ली में होगा समापन।

अरावली पर्वतमाला को बचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही 700 किलोमीटर लंबी संरक्षण यात्रा के दौरान जनसंवाद करतीं पर्यावरण कार्यकर्ता नीलम आहलुवालिया।
अरावली का महत्व और वर्तमान संकट
नीलम आहलुवालिया ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि:
"अरावली पर्वतमाला उत्तर भारत की जीवनरेखा है, जो न केवल जलस्तर संतुलन, जैव विविधता और जलवायु नियंत्रण में अहम भूमिका निभाती है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के क्षेत्रों को मरुस्थलीकरण से बचाने का कार्य भी करती है।"
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अवैध खनन, अंधाधुंध निर्माण और वन कटाई के कारण अरावली आज गंभीर संकट में है।
यात्रा का कार्यक्रम और संवाद
- 23 फरवरी: यह संरक्षण यात्रा विभिन्न शहरों और गांवों से होते हुए राजस्थान के सीकर पहुंचेगी।
- संवाद: सीकर में नीलम आहलुवालिया पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों से संवाद करेंगी।
- चर्चा के विषय: इस दौरान वे अरावली के महत्व, वर्तमान चुनौतियों और नागरिकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा करेंगी।
- 2 मार्च: यात्रा का समापन दिल्ली में होगा।
भावी पीढ़ियों के लिए अपील
समापन अवसर पर अरावली संरक्षण को लेकर नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों से ठोस कदम उठाने की अपील की जाएगी। नीलम आहलुवालिया ने कहा कि:
"ये केवल पर्यावरण को बचाने की मुहिम नहीं है बल्कि आने वाली पीढ़ियों की विरासत बचाने की जरूरत है। इसके लिए समाज के हर वर्ग के लोगों को आगे आना होगा।"
विभिन्न संगठनों का समर्थन और सहयोग
हाड़ौती संभाग के पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने इस यात्रा को जनआंदोलन की दिशा में एक सशक्त पहल बताते हुए इसका स्वागत किया है और अधिक से अधिक लोगों से इसमें जुड़ने की अपील की है। समर्थन देने वालों में प्रमुख हैं:
- प्रशांत पाटनी (संरक्षक, शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां)
- विष्णु साबू (चेयरमैन, इंटेक एडवाइजरी कमेटी)
- मुकेश सोनी (अध्यक्ष, संघर्ष समिति)
- बृजेश विजयवर्गीय (चंबल संसद कोटा और समिति संरक्षक)
- यज्ञदत्त हाडा (अखिल भारतीय गायत्री साधना आश्रम कोटा)
- विठ्ठल सनाड्य (बूंदी प्रभारी, पीपुल्स फॉर अरावली)
- डॉ मुकेश मीणा (प्रभारी, दिया फाउंडेशन)
- भानु गुप्ता (वृक्ष मित्र फाउंडेशन)

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
