बाराँ। अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा और संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी की कार्यप्रणाली पर विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि लगभग 700 किलोमीटर लंबी अरावली के भविष्य को लेकर निर्णय लेने से पहले ग्रामीणों, आदिवासियों, किसानों, पशुपालकों और पर्यावरण से जुड़े स्थानीय समुदायों से प्रत्यक्ष एवं सार्थक संवाद जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुओ मोटो रिट याचिका (सिविल) नंबर 10/2025 के तहत गठित समिति को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 31 अगस्त 2026 की समय-सीमा दी है। समिति ने 6 से 11 अगस्त के बीच दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के 9 जिलों का दौरा किया तथा चार शहरों में जन-सुनवाई की। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इतनी सीमित अवधि और क्षेत्रीय कवरेज में अरावली की जमीनी स्थिति का समग्र आकलन संभव नहीं है।



बांसवाड़ा से भारत आदिवासी पार्टी के लोकसभा सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि ईमेल और गूगल फॉर्म के माध्यम से सुझाव मांगना दूरदराज के ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों के लिए प्रभावी माध्यम नहीं है।

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि समिति को खनन और स्टोन क्रशिंग से प्रभावित गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।

लोकसभा सांसद अमरा राम ने कोटपूतली क्षेत्र के खनन प्रभावित गांवों, गिरजन नदी और सीकर के सलयोद्रा गांव का दौरा कर खनन से जुड़े प्रदूषण एवं स्वास्थ्य समस्याओं का अध्ययन करने की मांग की।

हरियाणा के कांग्रेस विधायक भारत भूषण बत्रा ने कहा कि गुड़गांव, फरीदाबाद, नूंह तथा भिवानी, चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ के खनन एवं प्रदूषण प्रभावित गांवों को समिति की फील्ड विजिट में शामिल किया जाना चाहिए था।

इंटेक एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन विष्णु कुमार साबू ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि जल, जैव विविधता, कृषि, वन्यजीवन और मानव जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है।

शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बाराँ के संरक्षक प्रशांत पाटनी ने कहा कि अरावली के अध्ययन में राजस्थान के महत्वपूर्ण पहाड़ी एवं वन क्षेत्रों को भी व्यापक पर्यावरणीय दृष्टि से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अरावली के भविष्य का फैसला केवल कागजी नक्शों के आधार पर नहीं होना चाहिए। समिति को गांवों में जाकर जंगल, पहाड़, जलस्रोत और जैव विविधता की वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए तथा शाहाबाद घाटी जैसे क्षेत्रों की आवाज भी सुननी चाहिए।”

राजनीतिक नेताओं एवं सामाजिक प्रतिनिधियों ने समिति से 31 अगस्त की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात के अरावली क्षेत्रों में व्यापक जन-संवाद एवं फील्ड अध्ययन कराया जाना चाहिए।

उन्होंने गांव-गांव जाकर ग्राम सभाएं, जन-सुनवाई और स्वतंत्र पर्यावरणीय निरीक्षण कराने की भी मांग की है। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक प्रतिनिधियों का कहना है कि अरावली की परिभाषा केवल नक्शे पर खींची जाने वाली रेखा नहीं, बल्कि पहाड़, जंगल, जल, जैव विविधता और करोड़ों लोगों के जीवन एवं आजीविका से जुड़ा प्रश्न है। इसलिए इसका अंतिम निर्णय व्यापक जनभागीदारी और वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही किया जाना चाहिए।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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