मानवता की मिसाल: बारां में एक ही दिन में संपन्न हुए दो नेत्रदान, चार नेत्रहीनों को मिली नई रोशनी
बारां में एक ही दिन में दो अलग-अलग परिवारों ने अपने प्रियजनों के निधन के पश्चात नेत्रदान कर चार नेत्रहीनों को जीवन में रोशनी दी। पूर्व सैनिक किशन लाल अदलखा और श्रीमती मोहिनी देवी के परिवारों की इस मानवतावादी पहल ने समाज में सेवा और जागरूकता की मिसाल पेश की।

बारां। मानवता और सेवा की भावना की अद्वितीय मिसाल पेश करते हुए बारां शहर में बीते दिन दो अलग-अलग परिवारों ने अपने प्रियजनों के निधन के पश्चात नेत्रदान का पुनीत निर्णय लिया। शाइन इंडिया फाउंडेशन के बारां शहर संयोजक हितेश खंडेलवाल ने बताया कि इस एक ही दिन में संपन्न दो नेत्रदान से चार नेत्रहीनों के जीवन में उजियारा लौटेगा।
पहला मामला पूर्व सैनिक किशन लाल अदलखा का है। समाज में प्रबुद्ध नागरिक और वर्ष 1965 एवं 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के सिपाही के रूप में अदम्य साहस का परिचय देने वाले किशन लाल का मध्य रात्रि को निधन हो गया। उनके पुत्र इंद्रजीत अदलखा, पुत्रवधू मनीषा अदलखा, पुत्रियां कुसुम व कविता तथा अन्य परिवारजन- राजकुमार, ललित गेरा और राकेश ने सर्वसम्मति से नेत्रदान की स्वीकृति दी। सेना से निवृत्त होने के बाद भी किशन लाल अदलखा समाज सेवा में सक्रिय रहे और पंजाबी समाज के संरक्षक तथा बारां ट्रक यूनियन के संस्थापक सदस्य के रूप में समाज में योगदान देते रहे।
दूसरा नेत्रदान श्रीमती मोहिनी देवी का हुआ, जो अनंत विहार कॉलोनी, कोटा रोड निवासी थीं। उनके निधन के बाद उनके पुत्र किशन गालव, अरविंद गालव, पुत्री कृष्णा तथा पुत्रवधू अनीता व बबीता सहित परिवार के अन्य सदस्यों की सहमति से यह प्रक्रिया पूरी की गई। इस पहल के पीछे कमल अरोड़ा का मार्गदर्शन और प्रेरणा भी रही।
नेत्रदान प्रक्रिया को संपन्न कराने में शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम और डॉ. कुलवंत गौड़ का समर्पित योगदान रहा। सूचना मिलते ही वे कोटा से बारां पहुंचे और दोनों नेत्रदानों को सफलतापूर्वक संपन्न किया।
बारां शहर में नेत्रदान के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। भारत विकास परिषद के अध्यक्ष नरेश खंडेलवाल ने बताया कि बीते दो महीनों में दस जोड़ी से अधिक नेत्रदान हुए हैं, जबकि अब तक बारां शहर से कुल 80 जोड़ी से अधिक नेत्रदान संपन्न हो चुके हैं। यह आंकड़े चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में बारां के लिए एक बड़ी उपलब्धि हैं। इन परिवारों का त्याग और परोपकार समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बने हैं।

Pratahkal Bureau
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