बारां। आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक और जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) का पावन मोक्ष कल्याणक महोत्सव बारां शहर में अपार श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सकल जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम ने संपूर्ण वातावरण को मंत्रोच्चार और भक्ति की लहरों से सराबोर कर दिया। अलसुबह से ही जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, जहाँ भक्त अपने आराध्य के चरणों में शीश नवाने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने उमड़े।

आयोजन का मुख्य आकर्षण भगवान आदिनाथ को विधि-विधानपूर्वक निर्वाण लाडू समर्पित करना रहा। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच जब श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से लाडू अर्पित किया, तो पूरा परिसर जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने आदिनाथ प्रभु के महान त्याग, कठिन तपस्या और मोक्ष प्राप्ति के गौरवशाली आदर्शों का स्मरण किया। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने आत्मिक शांति और संयम के महत्व को आत्मसात किया, जिससे माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक और शांतिमय बन गया।

इस पावन अवसर पर जैन समाज बारां के अध्यक्ष विनोद बड़जात्या एवं मंत्री अनिल बड़जात्या ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान आदिनाथ का जीवन केवल एक इतिहास नहीं, बल्कि अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण का एक जीवंत संदेश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मोक्ष कल्याणक का यह पर्व हमें सांसारिक मोह-माया और आसक्तियों से मुक्त होकर आत्मशुद्धि के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

जैन समाज के प्रवक्ता अमित जैन ने जानकारी दी कि उत्सव की व्यापकता शहर के कोने-कोने में दिखाई दी। जैन जोड़ल मंदिर में जैन सोशल ग्रुप द्वारा न केवल निर्वाण लाडू समर्पित किया गया, बल्कि 48 दीपकों के साथ प्रभु की भव्य और मनमोहक आराधना की गई। शाम के समय श्री संभवनाथ मंदिर में जैन फ्रेंड्स ग्रुप के सदस्यों ने 48 दीपकों के प्रज्वलन के साथ दिव्य भक्तामर पाठ का आयोजन किया, जिसकी स्वर लहरियों ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। जैन नसिया मंदिर सहित शहर के तमाम जिनालयों में इस पर्व की रौनक देखते ही बनती थी।

महोत्सव में समाज के गणमान्य नागरिकों सहित महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम का भव्य समापन विश्व शांति, सांप्रदायिक सद्भाव और प्राणिमात्र के कल्याण की मंगल कामना के साथ किया गया। बारां के जैन समाज द्वारा आयोजित यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन था, बल्कि यह समाज की एकजुटता और संस्कृति के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का भी प्रमाण बना।

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Pratahkal Bureau

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