बारां। राजस्थान के बारां नगर में भक्ति, शक्ति और संकल्प का एक ऐसा त्रिवेणी संगम देखने को मिला, जिसने समूचे क्षेत्र को भगवा रंग में सराबोर कर दिया। हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति, गणेश बस्ती के तत्वावधान में झालावाड़ रोड स्थित शुभम होटल एवं रिसॉर्ट में आयोजित 'विराट हिंदू सम्मेलन' ने न केवल सनातनी एकजुटता का प्रदर्शन किया, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए एक नई ऊर्जा का संचार भी किया। कार्यक्रम का आगाज़ मुख्य अतिथि श्री 1008 श्री महामंडलेश्वर श्री मधुसूदन दास जी महात्यागी जसपाल जी महाराज, विशिष्ट अतिथि विज्ञान भारती की प्रांत कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती अचला जी नागर और मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सह मंत्री श्रीमान युधिष्ठिर सिंह जी के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुंदरकांड मंडली द्वारा प्रस्तुत संगीतमय भजनों पर हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालु झूम उठे। आयोजन समिति के संयोजक श्रीमान पुरुषोत्तम जी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं द्वारा बीते एक माह से किए जा रहे कठोर परिश्रम का प्रतिफल रविवार को जनसैलाब के रूप में दिखाई दिया।

मंच से आशीर्वचन प्रदान करते हुए श्री 1008 श्री महामंडलेश्वर श्री मधुसूदन दास जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आज सनातन समाज को जातिवाद, ऊंच-नीच और आपसी ईर्ष्या की बेड़ियों को तोड़ना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक हम इन तुच्छ मतभेदों को त्याग कर एकजुट नहीं होंगे, तब तक अपनी गौरवशाली विरासत और राष्ट्र की रक्षा संभव नहीं है। वहीं, श्रीमती अचला जी नागर ने वैश्विक परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज जब दुनिया युद्ध और अशांति की आग में झुलस रही है, तब संपूर्ण विश्व शांति की तलाश में भारत की सनातन संस्कृति की ओर देख रहा है। उन्होंने विशेष रूप से मातृशक्ति के सशक्तिकरण और स्त्री शिक्षा को समाज की उन्नति का आधार बताया।

मुख्य वक्ता श्रीमान युधिष्ठिर सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देश भर में आयोजित होने वाले एक लाख सम्मेलनों की रूपरेखा साझा की। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, गुरु तेग बहादुर, अहिल्याबाई होलकर, छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन को आदर्श बताते हुए राष्ट्र सेवा का आह्वान किया। इतिहास के काले पन्नों को पलटते हुए उन्होंने आगाह किया कि कैसे आपसी फूट के कारण हम सदियों तक गुलाम रहे। श्री राम मंदिर के 500 वर्षों के संघर्ष और कारसेवकों के बलिदान को स्मरण करते हुए उन्होंने 'कृष्ण लला हम आएंगे, माखन मिश्री खाएंगे' का उद्घोष किया, जिससे पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा।

सम्मेलन में दुर्गा वाहिनी की बहनों द्वारा किए गए साहसिक शस्त्र प्रदर्शन ने उपस्थित जनसमूह को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का समापन भव्य महाआरती और महाप्रसादी के वितरण के साथ हुआ। अंत में संयोजक श्रीमान पुरुषोत्तम जी ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं और धर्मप्रेमी जनता का आभार प्रकट करते हुए इस ऐतिहासिक समागम के सफल समापन की घोषणा की।

Pratahkal Bureau

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