बारां के अंता में भक्ति की बयार: कृष्ण-सुदामा मिलन की गाथा के साथ भागवत कथा का भव्य समापन, उमड़ा जनसैलाब
बारां के अंता में पंडित मुकुट बिहारी शास्त्री द्वारा वाचित श्रीमद् भागवत कथा का हवन और विशाल भंडारे के साथ समापन हुआ। कृष्ण-सुदामा की अटूट मित्रता के प्रसंग ने भक्तों को भावुक कर दिया। धनराज और ब्रजराज मीणा सहित हजारों श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

बारां/अंता। भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का एक ऐसा संगम बारां जिले के अंता कस्बे में देखने को मिला, जिसने हर श्रद्धालु के हृदय को सराबोर कर दिया। कस्बे में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का समापन पूर्ण विधि-विधान के साथ हवन और विशाल भंडारे के रूप में हुआ। कथा के अंतिम पड़ाव पर भक्ति का रस ऐसा बरसा कि समूचा वातावरण 'राधे-राधे' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। सवाई माधोपुर से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित मुकुट बिहारी शास्त्री ने कथा के सातवें और अंतिम दिन भगवान श्री कृष्ण और उनके अनन्य मित्र सुदामा के प्रसंग का जीवंत वर्णन कर उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
शास्त्री जी ने मित्रता की परिभाषा को आध्यात्मिक धरातल पर रखते हुए कहा कि मित्रता में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सच्ची मित्रता न तो धन देखती है, न पद और न ही जाति; यह तो मात्र निस्वार्थ समर्पण और पावन प्रेम की परिणति है। जब द्वारकाधीश श्री कृष्ण ने एक निर्धन ब्राह्मण सुदामा को अपने सिंहासन पर बिठाकर स्वयं अपने हाथों से उनके चरण पखारे, तो उन्होंने संपूर्ण विश्व को समानता और प्रेम का वो शाश्वत संदेश दिया जो युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि भागवत कथा केवल एक श्रवण मात्र नहीं है, बल्कि यह जीव को परमात्मा से जोड़ने वाली वह कड़ी है जो अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
धार्मिक अनुष्ठानों की इसी कड़ी में कथा की पूर्णाहुति पर भव्य हवन का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान धनराज मीणा और ब्रजराज मीणा ने हवन कुंड में आहुतियां देकर क्षेत्र और देश में अमन-चैन व खुशहाली की मंगल कामना की। यज्ञ की पवित्र अग्नि और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था अर्पित की। कथा के समापन के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें कस्बे सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। इस आयोजन ने न केवल क्षेत्र में धार्मिक चेतना जागृत की, बल्कि सामाजिक समरसता और भक्ति का एक अनुपम उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
