बारां में मकर संक्रांति पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: जैन महिला संभाग ने गौसेवा के साथ पेश की जीवदया की अनुपम मिसाल
बारां में श्री दिगम्बर जैन महासमिति महिला संभाग ने मकर संक्रांति पर श्रीकृष्ण गोशाला में गौसेवा कर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की। अध्यक्ष ललिता टोंग्या व सचिव रानी नोपड़ा के नेतृत्व में सदस्याओं ने घर से बनी रोटियां, गुड़ और तिल के लड्डू खिलाकर जीवदया का संकल्प दोहराया। इस भावपूर्ण आयोजन ने पूरे शहर में करुणा और सेवा की नई अलख जगा दी है।

धर्मनगरी बारां में मकर संक्रांति का पावन पर्व केवल दान-पुण्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मूक प्राणियों के प्रति करुणा और सेवा का जीवंत उत्सव बन गया। श्री दिगम्बर जैन महासमिति महिला संभाग बारां ने इस पुनीत अवसर पर श्रीकृष्ण गोशाला में गौसेवा कर समाज के सम्मुख मानवीय संवेदनाओं और धार्मिक निष्ठा का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। कड़ाके की ठंड के बीच जब पूरा शहर उत्सव के उल्लास में डूबा था, तब इन महिलाओं ने अपनी व्यस्तता त्याग कर 'गावो विश्वस्य मातरः' के संकल्प को चरितार्थ किया।
संभाग अध्यक्ष ललिता टोंग्या के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम की सबसे भावुक और विशेष बात यह रही कि गोशाला पहुँचने वाली प्रत्येक सदस्या अपने घर से स्वयं के हाथों से बनी ताजी रोटियां साथ लेकर आईं। यह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि गायों के प्रति माँ जैसा ममत्व था। गोशाला के प्रांगण में श्रद्धा का ऐसा वातावरण निर्मित हुआ कि देखते ही देखते भारी मात्रा में गुड़, हरा चारा और तिल के लड्डुओं का ढेर लग गया। सदस्याओं ने अपने हाथों से गायों को यह सामग्री खिलाई, जिससे वहां मौजूद हर शख्स जीवदया के इस दृश्य को देख अभिभूत हो उठा।
अध्यक्ष ललिता टोंग्या ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति का पर्व परोपकार का संदेश देता है और गौसेवा को शास्त्रों में सर्वोत्तम सेवा माना गया है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए संगठन की सभी महिलाओं ने सामूहिक सहभागिता सुनिश्चित की। वहीं, संभाग सचिव रानी नोपड़ा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गौसेवा के इस पावन कार्य से न केवल आत्मिक शांति मिली, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे कार्यों से समाज में करुणा और सद्भाव का बीज अंकुरित होता है।
इस सेवा यज्ञ में संभाग की पूर्व अध्यक्ष चन्द्रकला सेठी सहित उपाध्यक्ष सरला जैन, विद्या गोधा, मंजु सोनी, चन्द्रकला पाटनी, पूर्णिमा सेठी, रूपकुमारी जैन, कुसुम जैन और लीना जैन ने सक्रिय रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन सभी सदस्याओं ने न केवल आर्थिक सहयोग दिया, बल्कि व्यक्तिगत रूप से श्रमदान कर गौवंश की देखरेख में हाथ बंटाया। कार्यक्रम के अंत में महिला संभाग ने भविष्य में भी इसी प्रकार समाजसेवा और जीवदया के प्रकल्पों को निरंतर जारी रखने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। बारां के प्रबुद्ध नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने महिला संभाग के इस निस्वार्थ प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की है।

Pratahkal Bureau
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