राजस्थान के बारां शहर में उत्तर भारतीय संस्कृति और अटूट परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ पंजाबी समाज और पंजाबी महिला मंडल द्वारा लोहड़ी का पर्व ऐतिहासिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कड़ाके की ठंड के बीच जब लोहड़ी की पावन अग्नि प्रज्वलित हुई, तो पूरा वातावरण 'सुंदर मुंदरिये' के लोकगीतों और ढोल की थाप से गूंज उठा। मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल सांस्कृतिक जीवंतता को दर्शाया, बल्कि सामुदायिक एकजुटता की एक नई मिसाल पेश की।

पंजाबी समाज के अध्यक्ष योगेश कुमरां बाटा और महिला मंडल अध्यक्ष मीना सोनू पिपलानी ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लोहड़ी का पर्व पंजाब की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। बारां में इस वर्ष का उत्सव विशेष रूप से उन परिवारों के लिए समर्पित रहा, जिनके घर में हाल ही में शहनाइयां गूंजी हैं या नन्हे कदमों की आहट हुई है। परंपरा के अनुसार, सूखी लकड़ियों की ऊँची ढेरी जलाकर उसमें रेवाड़ी, तिल, गुड़, मूंगफली और मक्का अर्पित किए गए। अग्नि के सात फेरे लेकर समाज के लोगों ने आरोग्य और समृद्धि की कामना की। विशेष रूप से नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के साथ आए परिवारों ने समाज के साथ मिलकर परिक्रमा की और पवित्र अग्नि में आहुति देकर बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त किया।

धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हुए इस समारोह में समाज के विद्वान पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न करवाई गई। इसके पश्चात वरिष्ठ पदाधिकारियों और समाज के गणमान्य जनों ने दीप प्रज्वलित कर विधिवत रूप से उत्सव का शुभारंभ किया। इस वर्ष सात नवविवाहित जोड़ों और आठ ऐसे परिवारों ने, जिनके घर संतान रत्न की प्राप्ति हुई है, मुख्य यजमान के रूप में अपनी भागीदारी निभाई। समारोह का सफल संचालन सोनू अरोड़ा और श्वेता डंग ने अपनी ओजस्वी वाणी से किया, जिससे अंत तक दर्शकों का उत्साह बना रहा।

इस भव्य आयोजन में समाज की एकता की झलक तब दिखी जब भारी संख्या में महिला-पुरुष और युवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष पदम पिपलानी, रामचंद्र झाम, महेंद्र पिपलानी, नरेंद्र बत्रा, रमेश गेरा मुन्ना, अशोक अदलखा, प्रमुख समाज सेवी अशोक बत्रा, दर्शन पिपलानी, वेद प्रकाश टककर, सुशील पंजाबी, देवेंद्र अदलक्कखा, हंसराज खत्री, सचिव मुकेश कुमरा, विजय पिपलानी, राजेंद्र डंग, गुलशन अदलक्खा, पवन अरोड़ा, रवि टककर, गुलशी, रितेश कोहली, मनोज पिपलानी, सोनू पिपलानी, समीर पिपलानी, गोल्डी अरोड़ा, सन्नी पिपलानी, सुरेंद्र पिपलानी, विकास अदलकखा, मनोज आदलखा, संजय आदलखा, धर्मपाल बत्रा, लोकेश गेरा, सुनील पिपलानी, राजन अरोड़ा, शैलेन्द्र गेरा, मनीष अदलाखा, अंकुश डंग, राजेंद्र आदलखा, पुनीत कुमरा, लक्ष्य पिपलानी, अक्षय पिपलानी, यश कलरा, अमन गेरा, प्रिंस कुमरा और चिराग पिपलानी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

वहीं महिला मंडल की ओर से अध्यक्ष मीना सोनू पिपलानी के साथ प्रीती अरोरा, सोनीया अदलकखा, रेखा कालरा, निधि गेरा, वैशाली अदलकखा, सचिव मीना नरेश पिपलानी, अंजना अरोड़ा, गीता डंग, रमा पिपलानी, सीमा कुमरा, प्रिंसी टक्कर, रिया खत्री, खुशी कुमरा, मेघा कुमरा, अंजू आदलक़खा, अंजू पिपलानी, मेघा पिपलानी, रेखा कलरा, पूनम गेरा, मोना पिपलानी और नूतन अरोड़ा सहित सैकड़ों महिलाओं ने पारंपरिक गीतों पर नृत्य कर लोहड़ी की खुशियों को दोगुना कर दिया। यह आयोजन केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि नई पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और खुशियों को साझा करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा, जिसकी गूँज लंबे समय तक बारां के गलियारों में सुनाई देगी।

Pratahkal Bureau

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