बारां। मेलखेड़ी रोड स्थित काठ्याबाबा आश्रम रविवार को उस क्षण का साक्षी बना, जब सैकड़ों लोग गहरे दुःख और श्रद्धा के साथ एक ऐसे व्यक्तित्व को विदाई देने एकत्र हुए, जिसकी जीवन यात्रा स्वयं ‘सेवा, साहस और सनातन निष्ठा’ का मूर्त रूप थी। सामाजिक कार्यकर्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व तहसील सहकार्यवाह, प्यारेराम मंदिर के पूर्व सचिव, काठियाबाबा आश्रम समिति के व्यवस्थापक तथा एकल अभियान के जिला सचिव रहे रामकरण सुमन के आकस्मिक निधन ने पूरे बारां जिले को शोकाकुल कर दिया। आश्रम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा भावनाओं, स्मृतियों और उनके अद्वितीय जीवन की गाथाओं से भर उठी।

सभा में संतों, प्रबुद्धजनों, एकल अभियान कार्यकर्ताओं तथा गौसेवकों की भारी उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि रामकरण सुमन का प्रभाव सिर्फ संगठनों या गतिविधियों तक सीमित नहीं था; वे लोगों के हृदयों में एक अटूट स्थान रखते थे। युगों से चली आ रही सनातन परंपरा में ‘कर्मयोगी’ शब्द जिन दुर्लभ व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त होता है, रामकरण सुमन उन्हीं में से थे। वक्ताओं ने एक स्वर में उन्हें ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ का जीवंत प्रतिमान बताया, जो असंभव को संभव बनाने के लिए पहचाने जाते रहे।

उनके जीवन का हर अध्याय कठिन राहों पर चलते हुए भी उन्हें सरल बनाने का साक्षी रहा। चाहे गाँव-गाँव जाकर संघ का विस्तार करना हो, अयोध्या कारसेवा का संकल्प उठाना हो या फिर कड़कड़ाती सर्दी में प्रातः 4 बजे उठकर गौमाता की सेवा करना—उन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों को कर्म के माध्यम से सिद्ध किया। उनके शब्दों में ‘असंभव’ के लिए कोई स्थान नहीं था और अन्याय के सामने झुकना उनके स्वभाव में कभी नहीं रहा। उन्होंने प्रचारकों को भगवान और अतिथियों को देवता मानकर सेवा को अपना धर्म बनाया।

श्रद्धांजलि सभा में सतीश अरोड़ा ने आश्रम के प्रति उनकी निष्ठा को याद करते हुए कहा कि उनकी सेवा भावना अतुलनीय थी। प्रमोद शर्मा ने उनकी निर्भीकता और अद्भुत क्षमता को प्रेरणादायक बताया। कैलाश शर्मा ने कहा कि वे संघ जीवन के लक्ष्य से कहीं आगे बढ़कर समाज के लिए कार्य करने वाले साहसी पुरुष थे। संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक रामेश्वर शर्मा ने उन्हें अपना मार्गदर्शक बताया, वहीं एकल अभियान के जिला अध्यक्ष डॉ. सुरेश मेघवाल ने उन्हें क्षेत्र की जानकारी का चलता-फिरता भंडार कहा। युवा कार्यकर्ता दीपांशु गेरा ने उन्हें स्वाभिमानी व्यक्तित्व का धनी बताया, जिसने जीवनभर केवल दिया ही दिया।

पूर्व विधायक हेमराज मीणा ने कहा कि उनकी जीवटता अद्भुत थी—वे जो ठान लेते थे, उसे पूरा करने तक चैन नहीं लेते थे। उपजिलाप्रमुख छीतरलाल पालरिया, द्वारकालाल प्रजापति, दिनेश शर्मा, चतुर्भुज सुमन, गुरुकुल पाण्डेय और पुरषोत्तम नामा ने उन्हें समाज का अनमोल रत्न बताया। संत नृसिंहाचार्य महाराज ने ऐसे व्यक्तित्व को ‘धन्य जीवन’ कहा। निर्मलदास महाराज ने ऐसी पवित्र आत्माओं के पुनः अवतरण की कामना की।

सभा के अंत में आचार्य परमानंद ने उन्हें ‘गृहस्थ संत’ की संज्ञा दी और कहा कि वे संत नरसी मेहता की भांति नारायण पर अखंड विश्वास रखने वाले विलक्षण तपस्वी थे। उनके अनुसार, रामकरण सुमन का देवलोक गमन सिर्फ व्यक्तिगत क्षति नहीं बल्कि पूरे बारां जिले के लिए अपूरणीय नुक़सान है।

कबीर की प्रसिद्ध उक्ति के अनुरूप, रामकरण जी संतोष और शांति के साथ ‘सुखद सो गये’, परंतु पीछे छोड़ गए प्रेरणाओं का ऐसा वटवृक्ष, जिसकी छाया आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र, समाज और धर्म की निडर सेवा के लिए सदैव प्रेरित करती रहेगी। दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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