उत्तर भारत में फिर तेज हुआ मानसून, यूपी-उत्तराखंड समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट|
उत्तर भारत के कई राज्यों में मानसून सक्रिय है, जिसके चलते उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है।
जलभराव भरी सड़क पर वाहन चलाते और पैदल चलते हुए लोग उत्तर भारत में मानसून की सक्रियता और भारी बारिश के संदर्भ में।
उत्तर भारत के कई हिस्सों में मानसून का प्रकोप एक बार फिर तेज हो गया है, जिससे मैदानी इलाकों से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों तक जनजीवन प्रभावित होने की पूरी संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के अनुसार, आठ सितंबर को उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा अपडेट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों के साथ-साथ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में लगातार मूसलाधार बारिश होने की आशंका जताई गई है, जिससे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
पर्वतीय राज्यों में मौसम का यह मिजाज विशेष रूप से चिंता का विषय बना हुआ है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के विस्तृत पूर्वानुमान में स्पष्ट किया गया है कि बारिश का यह दौर अभी कुछ और समय तक थमता नजर नहीं आएगा। पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड आने की गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन बलों को इन संवेदनशील क्षेत्रों में पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मैदानी इलाकों की बात करें तो उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों के साथ-साथ बिहार और पूर्वी भारत के अन्य हिस्सों में भी मानसूनी गतिविधियों का दौर लगातार जारी है। इन क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही के बीच गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश होने का अनुमान है। लगातार हो रही इन बारिशों के कारण निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे आम जनजीवन और आवागमन पर भी असर पड़ रहा है। मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्राओं से बचने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
प्रशासन द्वारा लगातार स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है और सुरक्षा के तमाम पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में राहत कार्य तुरंत शुरू किए जा सकें। मौसम की यह प्रणाली उत्तर भारत के कृषि और जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ वर्तमान में अत्यधिक सावधानी बरतने की मांग कर रही है। निवासियों से अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।