गुलमर्ग गोंडोला केबल कार में आई तकनीकी खराबी; हवा में फंसे पर्यटकों का रेस्क्यू
गुलमर्ग में समुद्र तल से 10,006 फीट की ऊंचाई पर खराबी के कारण हवा में फंसे यात्रियों को भारतीय सेना, पुलिस और SDRF की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाकर सुरक्षित निकाला।
गुलमर्ग में अचानक आई यांत्रिक खराबी के बाद हवा में फंसे केबल कार के डिब्बे (दाएं) और नीचे जमीन पर खड़े होकर बचाव अभियान की रणनीति बनाते भारतीय सेना के जवान व प्रशासनिक अधिकारी (बाएं)।
Gulmarg Gondola technical fault rescue : जम्मू-कश्मीर के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग से एक बेहद संवेदनशील और सांसें थाम देने वाली खबर सामने आई है, जहां एशिया की सबसे ऊंची और दुनिया की प्रमुख केबल कार प्रणालियों में से एक 'गुलमर्ग गोंडोला' में अचानक आई गंभीर तकनीकी खराबी के कारण सैकड़ों पर्यटकों की जान आफत में पड़ गई। सोमवार दोपहर को हुए इस अप्रत्याशित हादसे ने अचानक घाटी के प्रशासनिक अमले और सुरक्षा बलों को हाई-अलर्ट पर ला दिया। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच हवा में लटके चमकीले केबल कार के डिब्बों में फंसे मासूम सैलानियों के लिए यह समय किसी खौफनाक दुःस्वप्न से कम नहीं था। हालांकि, भारतीय सेना और स्थानीय आपदा टीमों की त्वरित सजगता से एक बड़ा हादसा होने से बच गया।
यह पूरा घटनाक्रम सोमवार दोपहर के ठीक मध्य में उस समय शुरू हुआ, जब गुलमर्ग गोंडोला केबल कार सेवा अपने नियमित संचालन पर थी। अचानक एक अप्रत्याशित मैकेनिकल फॉल्ट (तकनीकी व्यवधान) के कारण पूरी केबल कार प्रणाली ठप हो गई और उसके पहिए घूमना बंद हो गए। इसके परिणामस्वरूप, विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए पर्यटक पहाड़ी के पहले और दूसरे चरण के बीच, समुद्र तल से लगभग 8,694 फीट से लेकर 10,006 फीट की अत्यधिक डरावनी ऊंचाई पर हवा में ही फंस गए। अचानक गोंडोला के रुक जाने से हवा में लटके केबल के डिब्बों के भीतर चीख-पुकार मच गई और पर्यटकों के बीच ऑक्सीजन की कमी और ठंड के कारण घबराहट तेजी से फैलने लगी।
इस आपातकालीन संकट की सूचना मिलते ही भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाल लिया। सेना के जांबाज जवानों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), स्थानीय दमकल सेवाओं और गोंडोला ऑपरेटरों के साथ मिलकर एक बेहद जटिल और संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इस दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में केबल कार तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन बचाव दल ने भारी रस्सियों, विशेष सीढ़ियों और हर मौसम में चलने वाले ऑल-टेरेन वाहनों (ATVs) का उपयोग करके सीधे हवा में लटके केबलों तक पहुंच बनाई। कड़ाके की ठंड और ऊंचे पहाड़ी दबाव के बीच कई घंटों तक चले इस साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद, डिब्बों में फंसे एक-एक पर्यटक को बिना किसी चोट या हताहत के पूरी तरह सुरक्षित जमीन पर उतार लिया गया।
Gulmarg Gondola technical glitch in J&K: All tourists safely rescued.
— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) May 25, 2026
Video shows rescuers lowering people from suspended cabins using ropes as bystanders assist. pic.twitter.com/VhS3j0pJXB
इस संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा और घाटी के वरिष्ठ राजनीतिक नेता पल-पल की स्थिति पर व्यक्तिगत रूप से नजर बनाए हुए थे। आधिकारिक सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह पूरी दुर्घटना पूरी तरह से एक यांत्रिक (मैकेनिकल) खराबी थी और इसका मौसम के मिजाज से कोई संबंध नहीं था, क्योंकि हादसे के वक्त गुलमर्ग में मौसम पूरी तरह सामान्य था। सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए गोंडोला की सेवाओं को अगले आदेश तक पूरी तरह से निलंबित कर दिया है और तकनीकी विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय टीम को केबल कार के सेफ्टी ऑडिट और विस्तृत मैकेनिकल जांच के काम में लगा दिया है।
Indian Army, SDRF Lead Coordinated Rescue Operation After Gulmarg Gondola Malfunction
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) May 25, 2026
The Indian Army and State Disaster Response Force (SDRF) are leading a coordinated rescue and evacuation operation at Gulmarg Gondola after a technical fault in the Gondola cable car system… pic.twitter.com/YUmciXkoh6
इस घटना के सफल समापन ने एक बार फिर भारतीय सेना और कश्मीर के आपदा प्रबंधन ढांचे की तकनीकी और परिचालन क्षमता को वैश्विक स्तर पर साबित कर दिया है। गुलमर्ग गोंडोला न केवल कश्मीर के पर्यटन उद्योग की रीढ़ है, बल्कि हर साल लाखों सैलानियों को आकर्षित करने का सबसे बड़ा जरिया भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीकी खामियां भविष्य के लिए एक बड़ा सबक हैं, जो पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा करने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। बहरहाल, सभी पर्यटकों का सुरक्षित निकाला जाना घाटी के प्रशासनिक तंत्र के लिए राहत की बड़ी सांस लेकर आया है, जिससे गुलमर्ग के पहाड़ों में गूंजने वाली चीखें अंततः राहत और मुस्कान में तब्दील हो गईं।