विकास परियोजनाओं की बाधाएं होंगी दूर, सचिव पंकज कुमार पाण्डेय ने दिए समयबद्ध समाधान के निर्देश
सचिवालय में डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में विकास परियोजनाओं की बाधाओं पर चर्चा हुई। भूमि अधिग्रहण, वन भूमि हस्तांतरण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और लंबित प्रकरणों के समयबद्ध समाधान के लिए विभागीय समन्वय पर जोर दिया गया।
देहरादून स्थित सचिवालय में लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में राज्य की विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में शामिल प्रशासनिक अधिकारी।
विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करने और लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए विभागीय समन्वय, विस्तृत कार्ययोजना और नियमों के अनुरूप समाधान पर जोर दिया गया है। सचिव, लोक निर्माण विभाग डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में राज्य-विशिष्ट प्रारूप टिप्पणी (State-Specific Draft Note) को अंतिम रूप देने के संबंध में बैठक आयोजित की गई। इसमें अवधारणा-पत्र (Concept Note) और विभिन्न हितधारक विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रारूप टिप्पणी पर चर्चा की गई।
बैठक में पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राज्य में विकास कार्यों के क्रियान्वयन के दौरान सामने आ रही विभिन्न चुनौतियों और उनके समाधान के लिए प्राप्त सुझावों को प्रस्तुत किया गया। इस दौरान पीएम गतिशक्ति पोर्टल, भूमि राशि पोर्टल, परिवेश पोर्टल, भूमि अधिग्रहण, भूमि पर कब्जे का हस्तांतरण और वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही राइट ऑफ वे (RoW) से बाहर संपत्तियों को होने वाली क्षति के मुआवजे, यूटिलिटी शिफ्टिंग, लैंड बैंक, म्यूटेशन (भूमि नामांतरण) और रॉयल्टी से संबंधित मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में सिंगल विंडो व्यवस्था के माध्यम से ठेकेदारों द्वारा प्रस्तुत आवेदनों पर समयबद्ध अनुमति देने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के सुझाव भी रखे गए। इन विषयों पर चर्चा का उद्देश्य विकास कार्यों से जुड़ी प्रक्रियागत बाधाओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम तय करना रहा।
सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने कहा कि विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यूजर एजेंसियों को संबंधित प्रकरणों के दस्तावेजीकरण पर विशेष ध्यान देने और इस दिशा में अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रत्येक प्रकरण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने तथा संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं का समुचित अध्ययन करने पर जोर दिया।
उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, संबंधित नियमों, मूल कानून और भारत सरकार की गाइडलाइंस का गहन अध्ययन करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे प्रकरणों का सही आकलन करने और नियमों के अनुरूप समाधान निकालने में मदद मिलेगी।
डॉ. पाण्डेय ने संबंधित विभागों और यूजर एजेंसियों को समस्याओं के समाधान के लिए अपने स्तर पर प्रभावी पहल करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और परिस्थितियों को समझने के बाद प्रकरणों का समाधान तलाशने पर जोर दिया। साथ ही, सभी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करने और समस्याओं की पहचान करने के साथ उनके व्यावहारिक एवं नियमसम्मत समाधान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमों और प्रक्रियाओं में जहां बदलाव या संशोधन की आवश्यकता हो, ऐसे प्रकरणों को स्पष्ट रूप से चिह्नित कर उचित प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएं। विकास कार्यों से संबंधित प्रक्रियाओं और उनके प्रभावों को अच्छी तरह समझना आवश्यक है, ताकि समस्याओं का समाधान निर्धारित नियमों के दायरे में किया जा सके।
सचिव ने यूजर एजेंसियों और संबंधित विभागों के उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया, जिन्हें प्रशिक्षण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से संबंधित कार्मिकों को नियमों, प्रक्रियाओं और तकनीकी पहलुओं की सही जानकारी मिल सकेगी। इसके साथ ही उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, नियमों के अनुरूप समाधान सुझाने और लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद श्रीमती रंजना राजगुरु, अपर सचिव श्री विनीत कुमार, सलाहकार सेतु आयोग श्री विशाल पाराशर, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग श्री मनोज कुमार बिष्ट, अधीक्षण अभियंता यूपीसीएल श्री अरुण कांत, अधीक्षण अभियंता पिटकुल श्री राकेश कुमार और डीजीएम यूजेवीएनएल श्री मुकेश वर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी भौतिक रूप से उपस्थित रहे। वहीं, सभी जनपदों से जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
बैठक में दस्तावेजीकरण, कानूनी प्रावधानों के अध्ययन, प्रशिक्षण और विभागीय समन्वय को विकास परियोजनाओं से जुड़ी बाधाओं के समाधान के प्रमुख पहलुओं के रूप में रेखांकित किया गया। अधिकारियों को समस्याओं की पहचान के साथ व्यावहारिक और नियमसम्मत समाधान प्रस्तुत करने तथा लंबित मामलों को निर्धारित समयसीमा में निपटाने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।