चार साल से लंबित डीपीसी को मिली मंजूरी, वन विभाग में पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे
राजस्थान कैबिनेट ने वन अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी, जिससे चार साल से लंबित डीपीसी और पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
राजस्थान वन विभाग में लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पदोन्नति से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के लिए संगठन और विभागाध्यक्ष स्तर पर किए गए प्रयासों के बाद राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वन अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इससे पिछले करीब चार वर्षों से लंबित डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
13 अगस्त 2026 को आयोजित राजस्थान मंत्रिमंडल की बैठक में वन अधीनस्थ सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। नियमों में संशोधन के बाद अब राज्य स्तर पर डीपीसी की कार्यवाही किए जाने की संभावना बनी है। इससे लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे वन विभाग के कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान अधीनस्थ वन कर्मचारी संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि वन विभाग में पदोन्नति संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए संगठन लगातार प्रयास कर रहा था। संगठन के माध्यम से सांसद सी.पी. जोशी के समक्ष भी यह महत्वपूर्ण समस्या रखी गई थी। सुरेश चन्द्र शर्मा के अनुसार, सांसद सी.पी. जोशी के अथक प्रयासों से मामले को राज्य स्तर पर प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया गया, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रिमंडल ने नियम संशोधन को मंजूरी प्रदान की।
नियम संशोधन के बाद वन विभाग में सहायक वनपाल एवं वनपाल सहित संबंधित पदों पर पदोन्नति के अवसर बढ़ने का रास्ता साफ होगा। पिछले लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में मंत्रिमंडल के इस निर्णय को लेकर खुशी है।
सुरेश चन्द्र शर्मा ने राजस्थान अधीनस्थ वन कर्मचारी संघ की ओर से सांसद सी.पी. जोशी को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि संगठन, विभागाध्यक्ष एवं जनप्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयासों से कर्मचारियों के हित में यह महत्वपूर्ण निर्णय संभव हुआ है।
अब वन विभाग के कर्मचारियों को लंबित डीपीसी प्रक्रिया शुरू होने तथा पदोन्नति के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। 13 अगस्त 2026 को मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया यह निर्णय वन विभाग में पदोन्नति संबंधी लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।