अमेरिकी दूतावास द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई दिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय यूजर।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर जहां देश-दुनिया से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं, वहीं अमेरिका की ओर से आई एक शुभकामना ने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है। अमेरिकी दूतावास द्वारा दी गई इस बधाई पर भारतीय यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा है, और इसके पीछे की वजह हाल ही में अमेरिका द्वारा उठाया गया एक सख्त आर्थिक कदम है।

अमेरिकी दूतावास का बधाई संदेश और जनता का रिएक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर भारत में स्थित अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एक बधाई संदेश साझा किया। दूतावास ने लिखा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई देते हैं। आने वाले साल में आपके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं!"

लेकिन, इस औपचारिक बधाई के सामने आते ही भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स भड़क गए। लोग इसे अमेरिकी दोहरे रवैये के रूप में देख रहे हैं। दरअसल, इसके ठीक एक दिन पहले अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया था, जिसने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया है।

क्यों भड़के हुए हैं भारतीय यूजर्स?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने हाल ही में रूस और ईरान को प्रतिबंधित करने वाले 'लिंडसे ओ. ग्राहम अधिनियम, 2026' को मंजूरी दे दी है। इस नए कानून के तहत, जो देश रूस और ईरान से तेल और गैस का आयात करेंगे, उन पर राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 100 प्रतिशत टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जा सकता है।

जैसे ही अमेरिकी दूतावास ने पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी, यूजर्स ने इसे हाथों-हाथ लेते हुए तंज कसना शुरू कर दिया। एक यूजर ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा, "100% टैरिफ और भारतीय-अमेरिकियों पर हमलों के साथ जन्मदिन की बधाई। बहुत बढ़िया।" वहीं, दूसरे यूजर ने सीधे तौर पर कटाक्ष करते हुए लिखा, "और जन्मदिन का तोहफा है भारत पर 100% टैरिफ।" एक अन्य यूजर ने तो अमेरिका की क्लास लगाते हुए यहां तक कह डाला, "अरे यार, आपकी इच्छाओं की परवाह कौन करता है? आपने तो कल ही भारत पर 100% टैरिफ लगा दिया। आप एक बुरे देश हो।"

अमेरिका के 100% टैरिफ पर भारत का कड़ा रुख

अमेरिका के इस विवादास्पद फैसले और 100 फीसदी टैरिफ की तलवार लटकने के बाद भारत सरकार की ओर से भी त्वरित प्रतिक्रिया सामने आई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले इस कानून के पारित होने का कड़ा संज्ञान लिया है।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत अपने 140 करोड़ नागरिकों के लिए ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि सरकार इस पूरे मामले और इसमें होने वाली आगे की गतिविधियों पर बेहद करीबी नजर बनाए हुए है।

पीएम मोदी के जन्मदिन के जश्न के बीच अमेरिका के इस आर्थिक दबाव और जनता की तीखी प्रतिक्रिया ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।