आरबीआई ला रहा है आधुनिक करेंसी सिस्टम- जल्द बाजार में आएंगे 10 और 20 रुपये के नए प्लास्टिक नोट, जानें खासियत|
भारतीय रिजर्व बैंक देश में करेंसी सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए 10 और 20 रुपये के 200 करोड़ पॉलीमर नोटों का ट्रायल शुरू करने जा रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतीक चिह्न और 10 व 20 रुपये के नोट करेंसी सिस्टम में बदलाव के संदर्भ में।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की मुद्रा प्रणाली को आधुनिक, सुरक्षित और अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। आने वाले समय में देश के आम नागरिकों के हाथों में पारंपरिक कागजी नोटों की जगह 10 रुपये और 20 रुपये के नए प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोट दिखाई देंगे। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि सरकार और केंद्रीय बैंक ने इस महत्वाकांक्षी ट्रायल को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत प्रारंभिक चरण में 10 रुपये और 20 रुपये के 100-100 करोड़ यानी कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट बाजार में उतारे जाएंगे, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 3,000 करोड़ रुपये होगी।
भारतीय मुद्रा प्रणाली में इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य करेंसी नोटों की ड्यूरेबिलिटी यानी स्थायित्व को बढ़ाना, उनकी छपाई पर आने वाले भारी-भरकम खर्च को कम करना और फर्जी नोटों के कारोबार पर पूरी तरह से लगाम लगाना है। सामान्य कागजी नोट अक्सर पानी में भीगने, धूल-गंदगी लगने या लगातार इस्तेमाल से बहुत जल्दी फट जाते हैं या खराब हो जाते हैं। इसके विपरीत, पॉलीमर सबस्ट्रेट यानी विशेष प्लास्टिक सामग्री से बने ये बैंकनोट वजन में कागजी नोटों जितने ही हल्के होते हैं, लेकिन इनकी शेल्फ लाइफ यानी उम्र कागजी नोटों से कई गुना अधिक होती है। ये न तो आसानी से फटते हैं और न ही पानी में गलने से खराब होते हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान अकेले कागजी नोटों की छपाई पर रिजर्व बैंक को 6,372.8 करोड़ रुपये का भारी खर्च उठाना पड़ा था। पॉलीमर नोटों के लंबे समय तक सुरक्षित चलने से बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता कम होगी, जिससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाला यह वित्तीय बोझ काफी हद तक घट जाएगा। इसके अलावा, तकनीकी रूप से उन्नत पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट पर आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जैसे कि उन्नत होलोग्राम और रंग बदलने वाली स्याही का सटीक उपयोग करना बहुत आसान होता है। इन हाई-टेक सुरक्षा विशेषताओं के कारण जालसाजों और नकली नोट छापने वाले गिरोहों के लिए इन नोटों की नकल करना लगभग असंभव हो जाएगा, जिससे देश की वित्तीय सुरक्षा प्रणाली को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने अपनी प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स से लैस पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की आपूर्ति के लिए एक ग्लोबल टेंडर यानी 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) जारी किया गया है, जिसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित कंपनियों से बोलियां आमंत्रित की गई हैं। इस टेंडर प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त निर्धारित की गई है। कच्चे माल की आपूर्ति और टेंडर की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन आधुनिक प्लास्टिक नोटों की छपाई का वास्तविक कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
आम नागरिकों के मन में उठने वाली सबसे बड़ी शंका को दूर करते हुए रिजर्व बैंक और सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए प्लास्टिक नोटों के आने से मौजूदा 10 रुपये और 20 रुपये के पारंपरिक कागजी नोटों की वैधता पर कोई भी विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह पूरी प्रक्रिया एक 'को-एग्जिस्टेंस' यानी सह-अस्तित्व मॉडल पर संचालित होगी, जिसके तहत दोनों प्रकार के नोट बाजार में एक साथ वैध मुद्रा के रूप में चलन में बने रहेंगे। नए प्लास्टिक नोटों की बाजार में एंट्री अचानक नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से होगी, और जब तक ये नए नोट अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से स्थापित नहीं हो जाते, तब तक पुराने कागजी नोट सामान्य रूप से सर्कुलर में कार्य करते रहेंगे।
भारत के लिए पॉलीमर करेंसी का यह कॉन्सेप्ट पूरी तरह नया नहीं है। इससे पहले साल 2012 में भी देश में नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोट लाने का एक प्रयास किया गया था, हालांकि उस समय कुछ तकनीकी बाधाओं के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब व्यापक तकनीकी मूल्यांकन और इसके नफे-नुकसान का गहरा अध्ययन करने के बाद इस प्रोजेक्ट को एक बार फिर से पुनर्जीवित किया गया है। वैश्विक स्तर पर भी यदि नजर दौड़ाई जाए, तो ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड समेत दुनिया के 60 से अधिक देश पहले ही अपनी अर्थव्यवस्था में पॉलीमर बैंकनोट्स सफलतापूर्वक अपना चुके हैं। इस प्रकार, भारत का यह कदम देश की वित्तीय व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप और अधिक उन्नत बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।