भारत-ऑस्ट्रेलिया की नई दोस्ती से रक्षा संबंधों को मिली मजबूती, दुर्लभ खनिज कॉरिडोर का किया ऐलान|
मेलबर्न में पीएम मोदी और एंथनी अल्बनीज के बीच हुई अहम बैठक, रेयर अर्थ मिनरल और रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को मिली नई रफ्तार।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ तीसरी वार्षिक शिखर बैठक में हिस्सा लिया। इस उच्च-स्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने पर चर्चा हुई। बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गहरी समानता और आपसी विश्वास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था और साझा विश्व दृष्टिकोण आपसी सहयोग को लगातार प्रेरणा देते हैं। वर्ष 2022 में हुए आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते के बाद से दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार के दायरे में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 'रेयर अर्थ मिनरल' (दुर्लभ खनिज) कॉरिडोर का निर्माण है। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर क्रिटिकल अर्थ मिनरल कॉरिडोर पर काम करेंगे। यह पहल रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि रेयर अर्थ मिनरल की आपूर्ति श्रृंखला में चीन की वर्तमान निर्भरता को कम करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित होगा। इसके अलावा, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हुए समझौते से ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) लक्ष्यों को नई मजबूती मिलेगी।
रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर भी यह शिखर वार्ता मील का पत्थर साबित हुई है। दोनों देशों ने 'डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर' बनाने का निर्णय लिया है, जिसके माध्यम से दोनों देशों के डिफेंस स्टार्टअप और उद्योगों को आपस में जोड़ा जाएगा। साथ ही, मैरीटाइम सिक्योरिटी कोलैबोरेशन रोडमैप के जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर हुई संयुक्त घोषणा दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों की गहराई और क्षेत्रीय सुरक्षा में उनके योगदान को रेखांकित करती है।
आतंकवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया इसे मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती मानते हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों की लड़ाई साझा है और इसके प्रति संकल्प अटूट है। वैश्विक तनावों और युद्धों के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान पर जोर दिया। यह यात्रा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक, रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी को एक नए युग में ले जाने का स्पष्ट संकेत है, जो न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।