सवाई माधोपुर में 3050 विद्यार्थियों को सुरक्षित स्कूल और बाल अधिकारों के प्रति किया जागरूक
सवाई माधोपुर में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित जागरूकता शिविरों में लगभग 3050 विद्यार्थियों को बाल अधिकार, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, सुरक्षित विद्यालयी वातावरण और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई।
सवाई माधोपुर के साहूनगर स्कूल में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में संबोधित करतीं जिला एवं सेशन न्यायाधीश अनु अग्रवाल।
सवाई माधोपुर में विद्यार्थियों को सुरक्षित विद्यालयी वातावरण, शिक्षा के अधिकार और बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने के लिए मंगलवार, 13 अक्टूबर को विशेष जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सवाई माधोपुर के तत्वावधान में आयोजित इन शिविरों के माध्यम से लगभग 3050 विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘सुरक्षित स्थान, जहां सपनों को पंख मिलते हैं’ रखा गया।
जिला मुख्यालय सवाई माधोपुर में जिला एवं सेशन न्यायाधीश अनु अग्रवाल ने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, साहूनगर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया। इसके अतिरिक्त जिला मुख्यालय सवाई माधोपुर सहित तालुका गंगापुर सिटी, खण्डार, बौंली और चौथ का बरवाड़ा के न्यायिक अधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने जिले के विभिन्न विद्यालयों में शिविर लगाकर विद्यार्थियों को उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
शिविरों में विद्यार्थियों को निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 19 के प्रावधानों तथा इस अधिनियम के अंतर्गत बच्चों को प्राप्त अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही शिक्षा के अधिकार अधिनियम के महत्व, विद्यालयों में आवश्यक आधारभूत संरचना, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण की आवश्यकता और सुरक्षा मानकों के पालन के संबंध में जागरूक किया गया।
न्यायिक अधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने विद्यार्थियों को असुरक्षित विद्यालयी भवनों और आधारभूत संरचना से उत्पन्न होने वाले जोखिमों के बारे में भी जानकारी दी। उन्हें खतरनाक परिस्थितियों के चेतावनी संकेतों तथा ऐसी परिस्थितियों के कारण बच्चों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों से अवगत कराया गया। इसके अलावा विद्यालय में सुरक्षित रहने के उपायों, आपातकालीन स्थिति में अपनाए जाने वाले आवश्यक कदमों और विद्यालय परिसर को सुरक्षित बनाने में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
इस दौरान न्यायिक अधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने बच्चों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और अपनी सुरक्षा के लिए मजबूती से खड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि जहां शिक्षा होती है, वहां किसी भी बच्चे को असुरक्षित नहीं होना चाहिए। बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना उनकी शिक्षा, सर्वांगीण विकास और उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक है। सुरक्षित विद्यालयी वातावरण बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें निर्भीक होकर शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
शिविरों के दौरान विद्यार्थियों को आपातकालीन सहायता के लिए पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 एवं 112, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 तथा रालसा हेल्पलाइन नंबर 9928900900 की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी असुरक्षित परिस्थिति, अधिकारों के उल्लंघन अथवा विधिक सहायता की आवश्यकता होने पर संबंधित हेल्पलाइन और विधिक सेवा संस्थाओं से सहायता प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की ओर से बच्चों के अधिकारों की रक्षा, उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराने और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी गई।
इन जागरूकता शिविरों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, विद्यालयों में सुरक्षा के महत्व को समझाना और प्रत्येक बच्चे के लिए भयमुक्त, सुरक्षित एवं अनुकूल शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा। इसके माध्यम से बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।