लसाड़िया में होम्योपैथिक उपचार से 12 मिमी यूरेटरिक पथरी बाहर निकली, दर्जनों मरीजों को मिला लाभ
लसाड़िया के राजकीय होम्योपैथिक औषधालय में 12 मिमी यूरेटरिक पथरी का होम्योपैथिक उपचार से सफल मामला सामने आया। जानिए चिकित्साधिकारी ने क्या जानकारी दी।
तस्वीर में पीले धरातल पर पारदर्शी स्केल के पास रखी एक 12 मिलीमीटर आकार की पथरी दिखाई दे रही है।
सलूम्बर जिले के लसाड़िया स्थित राजकीय होम्योपैथिक औषधालय में होम्योपैथिक उपचार के माध्यम से 12 मिमी की यूरेटरिक पथरी (मूत्रवाहिनी की पथरी) को बिना शल्यक्रिया बाहर निकालने का मामला सामने आया है। औषधालय के चिकित्साधिकारी डॉ. अमित मेहता ने बताया कि अब तक पथरी की समस्या से ग्रसित दर्जनों से अधिक मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है।
डॉ. अमित मेहता के अनुसार, हाल ही में उपचार के लिए आए एक मरीज की मूत्रवाहिनी में 12 मिमी की पथरी फंसी हुई थी। उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक दवाओं के माध्यम से यह पथरी बाहर निकल गई। उनके अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में इतनी बड़ी पथरी के लिए कई मामलों में शल्यक्रिया या अन्य चिकित्सीय प्रक्रियाओं की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन इस मरीज को होम्योपैथिक उपचार से लाभ मिला।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज की स्थिति और आवश्यक चिकित्सकीय जांच के आधार पर दवाओं का चयन किया जाता है। उनके अनुसार, उपचार के दौरान कई मरीजों को दर्द में राहत मिली है तथा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को राजकीय होम्योपैथिक औषधालय के माध्यम से निशुल्क आयुष सेवाओं का लाभ भी मिल रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पथरी का उपचार उसके आकार, स्थान, मरीज के लक्षण और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए पथरी से पीड़ित मरीजों को किसी भी उपचार पद्धति को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। यह मामला ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध आयुष सेवाओं और चिकित्सकीय परामर्श के महत्व को भी रेखांकित करता है।