राजसमंद के सरकारी अस्पताल में जानलेवा लापरवाही: मरीज को थमाई एक्सपायरी दवा

राजसमंद के नाथद्वारा स्थित सरकारी अस्पताल में सामने आई एक चौंकाने वाली लापरवाही। मरीज को दी गई एक्सपायरी दवा, समय रहते परिजन की नजर पड़ने से टला बड़ा हादसा। क्या केवल नोटिस से सुधरेगा सरकारी अस्पतालों का हाल? जानें पूरी घटना।

Update: 2026-06-17 14:18 GMT

राजसमंद के नाथद्वारा स्थित गोड़हन राजकीय जिला चिकित्सालय में एक्सपायरी दवा मिलने के मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं।

नाथद्वारा के गोड़हन राजकीय जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां एक मरीज को एक्सपायरी डेट निकल चुकी दवा थमा दी गई। बुधवार की सुबह जब घनश्याम नामक एक मरीज का उपचार चल रहा था, तब उनके परिजनों ने अस्पताल स्थित सरकारी दवा केंद्र से औषधियां प्राप्त कीं। गंभीर लापरवाही का यह मामला तब उजागर हुआ जब परिजनों ने दवा के पैकेट पर अंकित तिथि की जांच की। उस पर अंकित एक्सपायरी तिथि मार्च 2026 थी, जबकि यह दवा जून 2026 में वितरित की गई थी।

समय रहते परिजनों की नजर दवा पर पड़ गई, जिससे एक बड़ा अनर्थ होने से टल गया। यदि मरीज अनजाने में इस अवधि पार दवा का सेवन कर लेता, तो न केवल उसकी स्थिति और अधिक बिगड़ सकती थी, बल्कि यह उसके जीवन के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता था। इस चूक ने अस्पताल की वितरण प्रणाली और दवाओं के भंडारण की निगरानी व्यवस्था पर गहरे प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

मामले के प्रकाश में आते ही चिकित्सालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अस्पताल के टीएमओ (TMO) ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दवा केंद्र के प्रभारी और वहां तैनात कर्मचारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर केवल नोटिस जारी करने की औपचारिकता ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता और स्वास्थ्य सेवा के जानकारों का मानना है कि जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे मामलों में महज नोटिस पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध प्रभावी और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

यह घटना न केवल एक मरीज के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है, बल्कि यह सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता और स्टॉक प्रबंधन की निगरानी में व्याप्त लापरवाही को भी उजागर करती है। प्रशासनिक व्यवस्था के सुस्त रवैये और जवाबदेही के अभाव ने एक बार फिर मरीजों के भरोसे को डगमगा दिया है, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

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