प्रतापगढ़ के दलोट में कुएं में मिला लापता किसान का शव, जांच शुरू

दो दिनों से लापता 52 वर्षीय किसान का शव कुएं में मिलने से हड़कंप। पुलिस ने मर्ग दर्ज कर शुरू की मामले की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार।

Update: 2026-06-26 14:27 GMT

प्रतापगढ़ के दलोट कस्बे में खेड़ापति हनुमान मंदिर के समीप कुएं के पास एकत्रित ग्रामीण और घटनास्थल का मुआयना करते पुलिस अधिकारी।

प्रतापगढ़ के सालमगढ़ थाना क्षेत्र के दलोट कस्बे में खेड़ापति हनुमान मंदिर के समीप स्थित एक खुले और बिना मुंडेर के कुएं में शुक्रवार दोपहर एक अधेड़ किसान का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान बडवास कला निवासी 52 वर्षीय शंकरलाल मीणा के रूप में हुई है, जो पिछले दो दिनों से लापता थे। शव कुएं में एक प्लास्टिक के काले कट्टे में फंसा हुआ तैर रहा था और करीब दो दिन पुराना होने के कारण काफी सड़-गल चुका था।

घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर एकत्र हो गई। सूचना पाकर निनोर चौकी प्रभारी सूरजमल मीणा पुलिस जाब्ते के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उप अधीक्षक चंद्रशेखर और सालमगढ़ थाना प्रभारी दीपक कुमार ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ कर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मृतक के परिजनों बालूराम मीणा एवं सोहनलाल मीणा ने पुलिस को बताया कि शंकरलाल दो दिन पूर्व अपने दोपहिया वाहन से घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने रिश्तेदारों और आसपास के क्षेत्रों में उनकी अथक तलाश की, परंतु कोई सुराग हाथ नहीं लगा। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे जब कुछ ग्रामीण खेड़ापति पड़ाव से गुजर रहे थे, तब उनकी नजर कुएं में तैरते शव पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से शव को कुएं से बाहर निकलवाकर दलोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मोर्चरी में रखवाया है। पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपा जाएगा।

थाना प्रभारी दीपक कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर गहन अनुसंधान कर रही है। मृत्यु के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही संभव हो सकेगा। फिलहाल पुलिस ने मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

शंकरलाल मीणा खेती-किसानी के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में दो पुत्र और चार पुत्रियां हैं। उनकी इस असामयिक और दर्दनाक मृत्यु से बडवास कला गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दुखद घटना के बाद ग्रामीणों ने बिना मुंडेर के खुले कुओं को हादसों का बड़ा कारण बताते हुए प्रशासन से ऐसे सभी कुओं पर तत्काल प्रभाव से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कराने की पुरजोर मांग की है।

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