7 मई या 9 मई- कब मनाएं टैगोर जयंती? जानिए टैगोर के जन्मदिन की तारीख हर साल क्यों बदल जाती है
रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 7 मई या 9 मई को क्यों मनाई जाती है? जानिए ग्रेगोरियन और बंगाली कैलेंडर के अंतर के कारण हर साल बदलती तारीख का पूरा सच, 2026 में 9 मई को होने वाले समारोह, और टैगोर के ऐतिहासिक योगदान की विस्तृत जानकारी।
नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर
भारतीय साहित्य और संस्कृति के महान स्तंभ रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती हर वर्ष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है, लेकिन इसकी तारीख को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। कोई इसे 7 मई बताता है तो कहीं 9 मई को भव्य आयोजन होते हैं। यह अंतर आखिर क्यों है, और इसका सही आधार क्या है, यह सवाल हर साल चर्चा में रहता है।
रवींद्रनाथ टैगोर, जिन्हें उनके उपनाम भानुसिंह के नाम से भी जाना जाता है, बंगाल पुनर्जागरण के एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे। वे केवल कवि ही नहीं, बल्कि लेखक, नाटककार, संगीतकार, दार्शनिक, सामाजिक सुधारक और चित्रकार भी थे। वर्ष 1913 में उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया था। वे इस सम्मान को पाने वाले पहले एशियाई, पहले गीतकार और पहले गैर-यूरोपीय व्यक्ति बने। भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक पहचान को आकार देने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने भारत और बांग्लादेश दोनों देशों के राष्ट्रगान की रचना की, जो उनकी रचनात्मक प्रतिभा का अद्वितीय उदाहरण है।
आधिकारिक रूप से रवींद्रनाथ टैगोर का जन्मदिन 7 मई 1861 को माना जाता है। यह तारीख ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार दर्ज है, जिसे आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जाता है। इसी आधार पर देश और दुनिया के कई हिस्सों में उनकी जयंती 7 मई को मनाई जाती है। हालांकि, बंगाल और त्रिपुरा जैसे क्षेत्रों में टैगोर की जयंती पारंपरिक बंगाली कैलेंडर के अनुसार मनाई जाती है, जिसे ‘पोहेला बोइशाख’ के बाद आने वाले ‘पचीशे बोइशाख’ यानी बोइशाख महीने की 25वीं तारीख कहा जाता है। यही कारण है कि हर साल यह तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर में बदलती रहती है।
वर्ष 2026 में यह तिथि 9 मई को पड़ रही है, जिसके चलते पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में इसी दिन ‘रवींद्र जयंती’ के रूप में भव्य आयोजन किए जाएंगे। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रवींद्र संगीत और साहित्यिक प्रस्तुतियों के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। यह दिन इन राज्यों में क्षेत्रीय सार्वजनिक अवकाश के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
इस प्रकार, रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती को लेकर 7 मई और 8 या 9 मई के बीच का अंतर किसी भ्रम का परिणाम नहीं, बल्कि दो अलग-अलग कैलेंडर प्रणालियों का प्रभाव है। जहां 7 मई उनकी आधिकारिक जन्मतिथि है, वहीं बंगाली परंपरा के अनुसार मनाई जाने वाली तिथि हर साल बदलती रहती है। चाहे यह जयंती 7 मई को मनाई जाए या 9 मई को, इसका महत्व टैगोर के अद्वितीय योगदान और उनकी अमर विरासत को याद करने में निहित है। उनकी रचनाएं और विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं, और यही उन्हें युगों-युगों तक प्रासंगिक बनाए रखता है।