जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी पर उमर अब्दुल्ला की केंद्र को दो टूक, बोले- क्या यहां आग लगवाना चाहते हैं?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को दी खुली चेतावनी, राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए मांगी स्पष्ट समयरेखा। केंद्र पर प्रशासन में हस्तक्षेप और जनता की उम्मीदों को दरकिनार करने का लगाया बड़ा आरोप।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि केंद्र सरकार उनके धैर्य को कमजोरी न समझे। हजरतबल में अपनी दादी बेगम अकबर जहान की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित पार्टी सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे और उनके सहयोगी जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए काम करने हेतु गधों की तरह मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र से राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए एक स्पष्ट समयरेखा की मांग की। उमर अब्दुल्ला ने केंद्र से सवाल किया कि यदि वे लद्दाख के लोगों से राज्य के दर्जे जैसे मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार हैं, तो फिर जम्मू-कश्मीर के लोगों से क्यों नहीं?
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र को खुद से पूछना चाहिए कि डेढ़ साल से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद भी नेशनल कॉन्फ्रेंस को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर क्यों होना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राजभवन के माध्यम से जम्मू-कश्मीर का प्रशासन नियंत्रित कर रही है। उन्होंने पूछा कि यदि उन्हें राजभवन के जरिए लोगों को परेशान करना, कर्मचारियों को बर्खास्त करना और बुलडोजर चलाना ही था, तो हमें आगे क्यों लाया गया? मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत अब जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सजा बन गई है। उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि यदि सरकार को काम ही नहीं करने देना था, तो चुनाव क्यों कराए गए?
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य और प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर केंद्र से संवाद के जरिए अधिकार हासिल करने की बात की थी, जबकि उन्हें पता था कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने केंद्र को चेतावनी देते हुए पूछा कि क्या वे यहां आग लगवाना चाहते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को उस समय ही बता देना चाहिए था कि वे सत्ता तो देंगे लेकिन हाथ पीछे बांधकर, और ऐसे अधिकारी देंगे जो लिए गए निर्णयों को लागू नहीं होने देंगे। मुख्यमंत्री ने केंद्र से उपयुक्त समय (एप्रोप्रियेट टाइम) के मायने स्पष्ट करने को कहा और पूछा कि इसका मतलब क्या भाजपा का सत्ता में आना है? उन्होंने मांग की कि सरकार में इसे सार्वजनिक रूप से कहने का साहस होना चाहिए। स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ही तय करेगी कि इन चुनावों के लिए उपयुक्त समय क्या होगा। गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा खत्म करने के साथ ही जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर राज्य का दर्जा छीन लिया गया था।