देवनार डंपिंग ग्राउंड नालेसफाई में लापरवाही, बीएमसी करेगी सैटेलाइट सर्वे

मुंबई के देवनार में जलभराव के खतरे और अवैध झोपड़ियों की जांच के लिए बीएमसी पिछले 10 सालों के सैटेलाइट रिकॉर्ड खंगालेगी; अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच।

Update: 2026-06-02 14:47 GMT

मुंबई में मानसून की दस्तक से ठीक पहले देवनार डंपिंग ग्राउंड के पिछले हिस्से में चल रहे नालेसफाई के कामों में भारी ढिलाई और लापरवाही सामने आई है। इस बेहद संवेदनशील इलाके में जलभराव के गंभीर खतरे को देखते हुए प्रशासन ने अब एक बड़ा और कड़ा रुख अपनाया है। नाले के आसपास के भूखंडों पर बड़े पैमाने पर फैली अवैध झोपड़ियों और अतिक्रमण की सघन जांच के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने अब 'सैटेलाइट सर्वे' कराने का निर्णायक फैसला किया है। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए पिछले दस सालों के रिकॉर्ड और तस्वीरों को खंगाला जाएगा, जिससे यह साफ हो सके कि इन जमीनों पर अवैध बस्तियां कब और किसकी शह पर बसी हैं।

इस संवेदनशील मामले में बीएमसी के बिल्डिंग एंड फैक्ट्री विभाग के अधिकारियों सहित कलेक्टर कार्यालय और वन विभाग की भूमिका भी पूरी तरह से जांच के दायरे में होगी। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह मांग बेहद तेजी से उठ रही है कि भले ही जमीन कलेक्टर या वन विभाग की हो, लेकिन इन अवैध निर्माणों को रोकने की अंतिम जिम्मेदारी हर हाल में बीएमसी को ही लेनी पड़ेगी। इसके पीछे मुख्य तर्क यह दिया जा रहा है कि जब भी किसी भी सरकारी जमीन पर अवैध झोपड़े बनते हैं, तो बाद में उन्हें पानी, बिजली और ड्रेनेज जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का काम बीएमसी ही करती है। बुनियादी सुविधाएं मिलने के कारण ही इन अवैध झोपड़पट्टियों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं और वे तेजी से पैर पसारने लगती हैं।

विपक्ष और स्थानीय नागरिकों का इस स्थिति पर स्पष्ट कहना है कि बीएमसी को केवल सुविधाएं देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अवैध झोपड़े बनते ही उन पर तुरंत और सख्त हथौड़ा चलाना चाहिए। सैटेलाइट सर्वे की इस नई और बड़ी मुहिम से अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि दशकों पुराने भू-माफियाओं के सिंडिकेट का पूरी तरह से पर्दाफाश होगा और आगामी मानसून के दौरान देवनार और उसके आसपास के इलाकों को जलमग्न होने से बचाया जा सकेगा।

Similar News