तस्वीर में मंदिर के भीतर पारंपरिक कपड़ों में खड़े हुए श्रद्धालु दिख रहे हैं।   

कोटा के विज्ञान नगर जैन मंदिर में आयोजित स्वाध्याय सभा में सिद्धांत विशारद सीताराम अग्रवाल ने संयम को जीवन की सफलता और आत्मिक शांति का आधार बताते हुए इंद्रियों पर नियंत्रण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अपनी इंद्रियों पर सम्यक रूप से नियंत्रण रखना ही संयम है। पांचों इंद्रियों को वश में रखते हुए दर्शन और ज्ञान से परिपूर्ण जीवन जीना संयम के प्रमुख लक्षण हैं।

सीताराम अग्रवाल ने कहा कि यदि मन, वचन और आहार पर नियंत्रण स्थापित हो जाए तो जीवन रूपी सवारी सही दिशा में आगे बढ़ते हुए अपनी मंजिल तक पहुंच सकती है। इसके विपरीत संयमहीन जीवन अशांति, कलेश, दुख, परेशानी, बीमारी, ईर्ष्या और द्वेष को जन्म देता है। उन्होंने कहा कि आत्मानुशासन केवल धार्मिक जीवन का हिस्सा नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार और जीवनशैली को संतुलित बनाने का माध्यम भी है।

मंदिर समिति के मंत्री पी.के. हरसोरा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान मुख्य शांति धारा एवं अभिषेक देवेंद्र गंगवाल और मुकेश खटोड़ ने किया। शांति धारा में कन्हैया लाल शक्करवाले, अनिल काला, विनोद जैन, विवेक जैन, अनिल बाकलीवाल एवं अरविंद ठौरा सहित अन्य श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

सुगंध दशमी के अवसर पर समाज के श्रद्धालु विभिन्न जैन मंदिरों में पहुंचकर धूप अर्पित कर रहे हैं। संस्था अध्यक्ष राजमल पाटोदी ने बताया कि इस अवसर पर मंदिरों में जैन दर्शन से संबंधित आकर्षक झांकियां भी सजाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि सुगंध दशमी जैन समाज के लिए धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण अवसर है।

विज्ञान नगर जैन समाज की ओर से 27 सितंबर को सामूहिक क्षमावाणी समारोह आयोजित किया जाएगा। राजमल पाटोदी ने बताया कि कार्यक्रम में समाज की प्रतिभाओं तथा उपवास करने वाले श्रद्धालुओं का सम्मान किया जाएगा। सामूहिक पूजन में बाबूलाल रेबारपुरा, अनिल ठौरा, पारस धनोपया, सीताराम जैन और राजेंद्र पाटनी सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।

सुगंध दशमी के धार्मिक आयोजनों के बीच संयम, आत्मानुशासन और इंद्रियों पर नियंत्रण का संदेश स्वाध्याय सभा में प्रमुखता से सामने आया, वहीं 27 सितंबर का सामूहिक क्षमावाणी समारोह समाज के आगामी प्रमुख आयोजन के रूप में आयोजित किया जाएगा।

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