बाल विवाह रोकथाम के साथ शिक्षा को गति: करौली में ‘बैक टू स्कूल अभियान’ अब 10 अगस्त 2026 तक विस्तारित
करौली में बाल विवाह रोकथाम और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने वाला ‘बैक टू स्कूल अभियान’ अब 10 अगस्त 2026 तक चलेगा। जानिए विस्तार की वजह और अभियान की प्रमुख पहल।
करौली। जिला प्रशासन एवं एक्शनएड एसोसिएशन–डीएमजी इवेंट्स, करौली द्वारा संचालित बाल विवाह रोकथाम एवं उन्मूलन परियोजना के तहत बाल विवाह की रोकथाम तथा प्रत्येक बच्चे, विशेषकर बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से चलाया जा रहा "बैक टू स्कूल अभियान" अब 10 अगस्त 2026 तक जारी रहेगा। अभियान का शुभारंभ 12 जून 2026 को विश्व बालश्रम निषेध दिवस के अवसर पर किया गया था। इसके बाद अभियान की अवधि पहले 12 जुलाई, फिर 25 जुलाई तक बढ़ाई गई और अब शिक्षा से वंचित बच्चों के अधिकतम नामांकन एवं आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इसे 10 अगस्त 2026 तक विस्तारित किया गया है।
जिला समन्वयक दिनेश कुमार बैरवा ने बताया कि अभियान को 10 अगस्त तक बढ़ाने के लिए ग्राम स्तरीय सतर्कता समिति, किशोरी समूहों, ग्राम स्वयंसेवकों एवं जिला बाल कल्याण समिति करौली द्वारा सुझाव दिए गए हैं। अभियान के दौरान मासलपुर ब्लॉक सहित सपोटरा के विभिन्न गांवों में व्यापक सर्वे और घर-घर संपर्क अभियान चलाकर विद्यालय से बाहर, अनामांकित एवं ड्रॉपआउट बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की पहचान की गई है। इनमें से अनेक बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। हालांकि, कई बच्चों के आधार कार्ड, जन्म प्रमाण-पत्र, टीसी, स्थानांतरण प्रमाण-पत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका प्रवेश अभी लंबित है।
उन्होंने बताया कि एक्शनएड एसोसिएशन के स्वयंसेवक संबंधित परिवारों के साथ निरंतर संपर्क में रहकर आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाने, सरकारी कार्यालयों से समन्वय स्थापित करने तथा विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया को सरल बनाने में सक्रिय सहयोग कर रहे हैं।
दिनेश कुमार बैरवा ने आगे बताया कि जिन बालिकाओं ने विद्यालय की अधिक दूरी, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों अथवा अन्य कारणों से पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी, उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की "शिक्षा सेतु योजना" के अंतर्गत प्रवेश दिलाने की कार्यवाही भी तेजी से की जा रही है, ताकि कोई भी बालिका शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
जिला बाल कल्याण समिति, करौली के अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी नागरिकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे अपने आसपास यदि कोई बच्चा विद्यालय से वंचित दिखाई दे तो उसे शिक्षा से जोड़ने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि शिक्षित बालिका ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बन सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस अभियान को कम से कम 10 अगस्त 2026 तक बढ़ाया जाना चाहिए।
जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य श्री फजले अहमद ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। जब प्रत्येक बच्चा विद्यालय से जुड़ेगा, तब उसका भविष्य सुरक्षित होगा और समाज में जागरूकता एवं समानता को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा केवल उनके व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज के सशक्तिकरण का आधार है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपनी बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और उन्हें किसी भी परिस्थिति में विद्यालय से वंचित न रखें। साथ ही अभियान को 10 अगस्त 2026 तक बढ़ाने का सुझाव भी दिया।
अभियान के अंतर्गत जिलेभर में समुदाय आधारित जनजागरूकता गतिविधियां, घर-घर संपर्क, विद्यालय भ्रमण, अभिभावक बैठकें, बालिकाओं की काउंसलिंग, दस्तावेज तैयार कराने में सहयोग तथा सरकारी विभागों के साथ समन्वय के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और कोई भी बालिका बाल विवाह का शिकार न बने। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए "बैक टू स्कूल अभियान" को 10 अगस्त 2026 तक बढ़ाया गया है।