जालना में सूखे से 6 लाख हेक्टेयर से अधिक फसल प्रभावित, किसानों के लिए 625.75 करोड़ रुपये की मांग
महाराष्ट्र के जालना जिले में खरीफ सीजन 2026 के सूखे से 6,00,688.49 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। फसल नुकसान के सर्वेक्षण के बाद किसानों के मुआवजे के लिए 625.75 करोड़ रुपये की मांग की गई है। अब शासन के अगले निर्देशों और राहत राशि पर नजर है।
महाराष्ट्र के जालना जिले में खरीफ सीजन 2026 के दौरान सूखे जैसी स्थिति के कारण किसानों की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। जिले में कुल 6,00,688.49 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। फसल नुकसान का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के लिए 625.75 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई है। जिला प्रशासन ने तालुकावार अंतिम रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए शासन को भेज दी है। अब किसानों को राहत राशि मिलने का इंतजार है।
जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से यह रिपोर्ट विभागीय आयुक्त, छत्रपति संभाजीनगर और शासन के पास आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्तुत की गई है। खरीफ सीजन के दौरान सूखे जैसी स्थिति से प्रभावित जालना, बदनापुर, भोकरदन, जाफराबाद, अंबड, घनसावंगी, मंठा और परतूर समेत सभी आठ तालुकों में फसलों के नुकसान का जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण किया गया। प्रशासन ने सर्वेक्षण के आधार पर प्रभावित क्षेत्र, फसलवार नुकसान और मुआवजे के लिए आवश्यक धनराशि का विवरण संकलित किया है।
अंतिम संकलित रिपोर्ट के अनुसार, घनसावंगी तालुका के लिए सबसे अधिक 112.88 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई है। इसके बाद अंबड तालुका के लिए 107.26 करोड़ रुपये, भोकरदन के लिए 71.16 करोड़ रुपये, परतूर के लिए 64.34 करोड़ रुपये, मंठा के लिए 60.04 करोड़ रुपये, बदनापुर के लिए 56.17 करोड़ रुपये, जाफराबाद के लिए 52.49 करोड़ रुपये और जालना तालुका के लिए 48.46 करोड़ रुपये की आवश्यकता दर्शाई गई है। इन सभी तालुकों के प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के लिए कुल 625.75 करोड़ रुपये के फंड की मांग की गई है।
जिले में सूखे से प्रभावित क्षेत्र में मुख्य रूप से वर्षा आधारित खेती शामिल है। सोयाबीन, कपास, मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, उड़द, मूंग और मूंगफली सहित अन्य फसलों को हुए नुकसान का अलग-अलग रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसके साथ ही सिंचित खेती और फल फसलों को हुए नुकसान को भी अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
सूखे की स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तालुकों से संबंधित जानकारी मध्यम सूखा (33 से 50 प्रतिशत) और गंभीर सूखा (50 प्रतिशत से अधिक) की श्रेणियों के अनुसार भी शासन को सौंपी है। इस वर्गीकरण के साथ प्रभावित क्षेत्र और फसल नुकसान का विवरण आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया गया है।
जिला प्रशासन के अनुसार, प्रभावित किसानों को शासन के प्रचलित मानदंडों के तहत सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रक्रिया जारी है। फसल नुकसान के सर्वेक्षण, फसलवार क्षति, प्रभावित क्षेत्र और अपेक्षित मुआवजा राशि की जानकारी शासन को भेज दी गई है। अब शासन से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खरीफ सीजन में सूखे के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे जालना जिले के किसानों की नजर अब मुआवजे पर है। नुकसान का सर्वेक्षण पूरा होने और 625.75 करोड़ रुपये की मांग शासन के समक्ष रखे जाने के बाद किसानों को यह इंतजार है कि उन्हें राहत राशि कब तक मिलेगी।