नई दिल्ली में आयोजित भारत आरई समिट के दौरान सीएम भजनलाल शर्मा ने राजस्थान स्टॉल्स का उद्घाटन किया।   

नई दिल्ली में आयोजित ‘भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो-2026’ के जरिए राजस्थान की अक्षय ऊर्जा क्षमताओं और निवेश के अवसरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भारत मंडपम में सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी की उपस्थिति में 50 से अधिक प्रमुख निवेशकों के साथ राउंड टेबल बैठक की। मुख्यमंत्री ने राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं और उपलब्ध अवसरों को रेखांकित करते हुए निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में 50 प्रतिशत से अधिक विद्युत क्षमता गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों पर आधारित हो चुकी है। यह उपलब्धि पेरिस समझौते के तहत निर्धारित वर्ष 2030 के लक्ष्य से पांच वर्ष पहले, वर्ष 2025 में ही हासिल कर ली गई है। उन्होंने कहा कि ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ की भावना के साथ भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की राउंड टेबल बैठक में ब्रुकफील्ड, रिन्यू, आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स, जिंदल समूह और अवाडा सहित अन्य प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं और उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में निवेश के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने राजस्थान की स्टॉल्स का उद्घाटन किया और उनका अवलोकन किया। इस दौरान ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान देश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन और सौर ऊर्जा क्षमता स्थापना के क्षेत्र में प्रथम स्थान पर है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक लगभग 125 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति लागू की है। मेगा अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ‘राइट टू यूज’ नीति भी जारी की गई है। इसके साथ ही राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2024 के तहत निवेशकों को विभिन्न प्रोत्साहन और सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में 51 हजार मेगावाट से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है। इसमें सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 45 हजार मेगावाट से अधिक है। राज्य में बड़े सौर पार्कों, रूफटॉप सोलर, पवन ऊर्जा, बायोमास और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा के अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग करने और पीक डिमांड के दौरान ग्रिड प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास की कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत ऊर्जा क्षमता को व्यवस्थित तरीके से बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

‘निवेश करें, नवाचार करें, प्रेरित करें’ थीम पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राजस्थान सहित देश के 13 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं, निवेश के अवसरों और विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित किया जा रहा है। एक्सपो में राजस्थान की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया है।

2 से 5 नवम्बर तक आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। वहीं, 400 से अधिक प्रदर्शक सौर एवं पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और अन्य उभरते क्षेत्रों की अत्याधुनिक तकनीकों तथा स्वच्छ ऊर्जा समाधानों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

सम्मेलन का उद्देश्य स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक निवेश, औद्योगिक भागीदारी और तकनीकी साझेदारियों को प्रोत्साहित करना है। राजस्थान की बढ़ती अक्षय ऊर्जा क्षमता, वर्ष 2030 तक 125 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य और निवेशकों के साथ हुई बैठक प्रदेश को नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसरों के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

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