राजस्थान पुलिस का जयपुर में सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण 15 अक्टूबर से शुरू होगा
पुलिसकर्मियों के व्यवहार और संवाद शैली में सुधार के लिए आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है।
राजस्थान पुलिस के पुलिसकर्मियों के दृष्टिकोण और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से 15 अक्टूबर से जयपुर में तीन दिवसीय सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। ‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग’ विषय पर होने वाले इस प्रशिक्षण का शुभारंभ महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा करेंगे। 15 से 17 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला यह कार्यक्रम जयपुर में सांगानेर एयरपोर्ट के पास स्थित आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में आयोजित होगा। इसका आयोजन उदय पारीक एचआरडी रिसर्च फाउंडेशन, जयपुर की ओर से किया जा रहा है।
एडीजी ट्रेनिंग श्री राघवेंद्र सुहासा ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिसकर्मियों की मनोवृत्ति, कार्यशैली और नागरिकों के साथ व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। कार्यक्रम में आत्म-जागरूकता, व्यावसायिक पहचान, सकारात्मक मानसिकता, तनाव प्रबंधन और नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन 15 अक्टूबर को होगा। सुबह 9:30 बजे प्रतिभागियों के पंजीकरण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। सुबह 10 बजे फाउंडेशन के चेयरमैन श्री अपूर्व कुमार स्वागत उद्बोधन देंगे, जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा। पूर्व डीजीपी डॉ. एम.के. देवराजन कार्यक्रम का परिचय देते हुए इसकी रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। सुबह 10:15 बजे महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा उद्घाटन संबोधन देंगे। इसके बाद आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. पी.आर. सोडाणी धन्यवाद ज्ञापित करेंगे। चाय के बाद सुबह 11 बजे डीजीपी श्री शर्मा मीडिया से भी रूबरू होंगे।
प्रशिक्षण के पहले दिन 15 अक्टूबर को ‘खुद को जानें, खुद का नेतृत्व करें’ विषय पर सत्र आयोजित होगा। इसमें आत्म-जागृति, व्यावसायिक पहचान और सकारात्मक मानसिकता के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही नैतिकता, मूल्यों और समस्या-केंद्रित पुलिसिंग से आगे बढ़कर शक्ति-आधारित (Strength-based) पुलिसिंग अपनाने पर जोर रहेगा।
दूसरे दिन 16 अक्टूबर को ‘दबाव की परिस्थितियों में पुलिसिंग’ विषय पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें कार्य के दौरान तनाव को समझने, भावनात्मक परिस्थितियों में संयम बनाए रखने, प्राथमिकताएं तय करने और नागरिकों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार विकसित करने से जुड़े पहलुओं पर काम होगा। कठिन संवाद, नाराज शिकायतकर्ताओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए भूमिका-अभिनय तथा समूह अभ्यास भी कराए जाएंगे।
तीसरे दिन 17 अक्टूबर को ‘अंतर्दृष्टि से सकारात्मक पुलिसिंग तक’ विषय के अंतर्गत प्रशिक्षण के दौरान मिली सीख को वास्तविक कार्य परिस्थितियों में लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें सकारात्मक व्यवहार, प्रभावी संवाद, सक्रिय रूप से सुनने, आपसी संबंध मजबूत करने और नागरिकों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध विकसित करने के व्यावहारिक उपायों पर काम होगा। प्रशिक्षण के समापन पर व्यक्तिगत और इकाई स्तर की कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी। इसके साथ ही अधिकारियों को अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध किया जाएगा।
कार्यक्रम में केवल व्याख्यानों तक सीमित रहने के बजाय अनुभवात्मक शिक्षण, केस स्टडी, भूमिका-अभिनय, समूह अभ्यास, आत्म-चिंतन और सहकर्मियों से फीडबैक जैसी विधियों का उपयोग किया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को वास्तविक कार्य परिस्थितियों में अपने व्यवहार, निर्णय लेने की क्षमता और संवाद शैली को बेहतर बनाने के अवसर मिलेंगे।
प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, दबाव की स्थिति में बेहतर प्रदर्शन करने और नागरिकों के दृष्टिकोण को समझने के लिए भी तैयार किया जाएगा। साथ ही पुलिस थानों में अधिक सकारात्मक और नागरिक-केंद्रित वातावरण विकसित करने पर विशेष ध्यान रहेगा। तीन दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों के व्यवहार और कार्यशैली में ऐसे व्यावहारिक बदलाव लाना है, जिनसे नागरिकों के साथ संवाद और आपसी विश्वास को मजबूत किया जा सके।