रेलवे सुधारों से सीमेंट ढुलाई में 170% की वृद्धि, अब फ्लाई ऐश पर नजर
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नए बल्क सीमेंट टैंक कंटेनरों की समीक्षा की; अब 300 मिलियन टन फ्लाई ऐश को राष्ट्रीय संपदा में बदलने का लक्ष्य।
भारतीय रेलवे के माल ढुलाई ढांचे में किए गए क्रांतिकारी सुधारों के परिणामस्वरूप पिछले चार महीनों में सीमेंट की आवाजाही में 170 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। यह ऐतिहासिक सफलता पिछले वर्ष नवंबर में सीमेंट परिवहन नीति में किए गए व्यापक बदलावों का सीधा परिणाम है, जिसमें निर्बाध एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स के लिए नए बल्क सीमेंट टैंक कंटेनरों को शामिल किया गया था। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज कंटेनर क्षेत्र के इन सुधारों और उनके जमीनी कार्यान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य सड़क परिवहन पर निर्भरता कम कर स्वच्छ और अधिक कुशल रेल लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहित करना है। रेलवे ने इसके लिए विशेष अनुकूलित टैंक कंटेनर और बल्क सीमेंट टर्मिनल नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया है।
केंद्रीय मंत्री ने समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया कि इस नई प्रणाली ने लोडिंग और अनलोडिंग की प्रक्रिया को अत्यंत सरल बना दिया है, जिससे सामग्री की बर्बादी न्यूनतम हो गई है। एक स्थान पर उत्पादित सीमेंट अब विशेष टैंक कंटेनरों के माध्यम से सीधे उपभोग केंद्रों तक पहुंच रहा है, जिससे मध्यवर्ती हैंडलिंग प्रक्रियाओं में कमी आई है और प्लांट-टू-मार्केट दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ये कंटेनर मानक आकार के हैं और रेडी-मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) मशीनों के पूरी तरह अनुकूल हैं, जिससे सीमेंट निर्माण स्थलों तक सीधे उपयोग हेतु तैयार रूप में पहुंचता है। हैंडलिंग के दो चरणों के कम होने से न केवल लॉजिस्टिक्स लागत घटी है, बल्कि संपूर्ण प्रक्रिया की गति भी तेज हुई है।
सीमेंट लॉजिस्टिक्स में आया यह परिवर्तन निर्माण उद्योग में एक 'खामोश क्रांति' का सूत्रपात कर रहा है। लागत में आ रही इस कमी से निर्माण सामग्री अधिक किफायती होने की उम्मीद है, जो विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्ग के लिए आवास को सुलभ बनाने के लक्ष्य में सहायक सिद्ध हो रही है। ये नए "मेक इन इंडिया" टैंक कंटेनर ट्रेन से ट्रेलर और पुनः ट्रेन में निर्बाध आवाजाही के लिए डिजाइन किए गए हैं, जो कुशल डोर-टू-डोर लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करते हैं। प्रत्येक कंटेनर मशीनीकृत लोडिंग-अनलोडिंग की सुविधा से लैस है, जो पारंपरिक बोरीबंद सीमेंट परिवहन की तुलना में रिसाव और पैकेजिंग के नुकसान को प्रभावी ढंग से रोकता है।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे धूल का उत्सर्जन कम हुआ है और सड़कों पर ट्रकों की भीड़भाड़ घटने से ईंधन की खपत एवं प्रदूषण में गिरावट आई है। सीमेंट परिवहन की सफलता के बाद अब रेलवे फ्लाई ऐश परिवहन के विशाल बाजार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। श्री वैष्णव ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में थर्मल पावर प्लांटों द्वारा उत्पन्न इस कचरे को 'राष्ट्रीय संपदा' में बदलने का आह्वान किया। वर्तमान में देश में उत्पादित लगभग 300 मिलियन मीट्रिक टन फ्लाई ऐश में से रेलवे केवल 13 मिलियन टन का परिवहन करता है। रेल मंत्री ने इस हिस्सेदारी को तेजी से बढ़ाने और ईंट भट्टों, सीमेंट उद्योगों तथा निर्माण स्थलों तक इसकी पहुंच सुगम बनाने के निर्देश दिए हैं। "अपशिष्ट से धन" (वेस्ट टू वेल्थ) के इस विजन से न केवल औद्योगिक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण होगा, बल्कि सड़क और भवन निर्माण की लागत में भी कमी आएगी, जो भविष्य के सतत बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक निर्णायक कदम साबित होगा।