अंगदान को आंदोलन बनाने का आह्वान, राज्यपाल बागडे ने जागरूकता पर दिया जोर
राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में अंगदान जागरूकता कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अंगदान को महादान बताते हुए इसे आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने, भ्रांतियां दूर करने और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
तस्वीर में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, जयपुर में अंगदान जागरूकता कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित लोगों को अंगदान की शपथ दिलाते हुए नजर आ रहे हैं।
जयपुर, 3 अगस्त। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में सोमवार को "अंगदान दिवस" के अवसर पर आयोजित अंगदान जागरूकता कार्यक्रम में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने अंगदान को मानवता के लिए अपने आपको समर्पण से जुड़ा महादान बताया। उन्होंने कहा कि अंगदान की सबसे बड़ी बाधा मनुष्य के भीतर का डर है। इसे दूर करने और लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने समाज में अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का आह्वान किया।
राज्यपाल श्री बागडे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अंगदान दिवस मनाने की बजाय इसे एक आंदोलन मानकर क्रियान्वित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंगदान और जन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रसार जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य जागरूकता के लिए भी अभियान चलाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने बताया कि हमारे देश में किडनी का सफल प्रत्यारोपण एक दिसम्बर 1971 को तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने इतने वर्षों पहले अंग प्रत्यारोपण की शुरुआत होने के बावजूद अंगदान के प्रति अपेक्षित जागरूकता नहीं होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खान-पान की आदतों में सुधार और व्यसन मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में भी कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हम घर में एक दिन पहले बनी रोटी नहीं खाते, लेकिन बाजार से पुरानी बनी ब्रेड खरीदकर खा लेते हैं।
राज्यपाल ने कार्यक्रम के आरम्भ में उन सभी महान आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अपना अंग दान कर दूसरों को नया जीवन दिया है। उन्होंने उपस्थित लोगों को अंगदान की शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा कि हमारे देश में हर वर्ष लाखों लोग विभिन्न अंगों की आवश्यकता के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। किडनी, लिवर, हृदय और फेफड़ों की मांग आज भी सर्वाधिक है, लेकिन उपलब्धता बहुत कम है।
उन्होंने कहा कि अंगदान के महत्व को समझाना जरूरी है, क्योंकि इससे हम किसी अन्य व्यक्ति की जिंदगी में नई उम्मीदों का सवेरा ला सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख लोग अंग प्रत्यारोपण नहीं होने से अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाएं अच्छी हैं, लेकिन अंगदान करने वालों की संख्या अभी भी बहुत कम है।
राज्यपाल श्री बागडे ने अंगदान के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ अंगदान से जुड़ी सेवाओं का प्रदेश में विस्तार करने और सभी अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण संबंधी उपकरणों की व्यवस्था प्रभावी रूप से किए जाने पर जोर दिया।
इससे पहले राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलगुरु प्रो. प्रमोद येवले और राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने अंगदान के महत्व और आयोजन से जुड़े सरोकारों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने अंगदान जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण प्रयास करने वाले चिकित्सकों और "अंगदान" जागरूकता प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया।
अंगदान जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से राज्यपाल ने समाज में अंगदान को लेकर विश्वास बढ़ाने, भ्रांतियों को दूर करने और जरूरतमंद लोगों को जीवनदान देने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया।